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ओके…धनकटनी के लिए बिहार पलायन कर रहे हैं कई लोग, कहते हैं

अोके…धनकटनी के लिए बिहार पलायन कर रहे हैं कई लोग, कहते हैंफोटो-20 डालपीएच-1कैप्सन-पलायन के लिए जाते मजदूरहेडलाइन…चुनाव देखेंगे, तो दाने-दाने को तरस जायेंगे पंचायत चुनाव में शामिल होने, वोट देने की इच्छा है, पर पेट का सवाल भारी है. घर में खाने के लिए कुछ नहीं है. अकाल ने घेर रखा है. ऐसे में पलायन […]

अोके…धनकटनी के लिए बिहार पलायन कर रहे हैं कई लोग, कहते हैंफोटो-20 डालपीएच-1कैप्सन-पलायन के लिए जाते मजदूरहेडलाइन…चुनाव देखेंगे, तो दाने-दाने को तरस जायेंगे पंचायत चुनाव में शामिल होने, वोट देने की इच्छा है, पर पेट का सवाल भारी है. घर में खाने के लिए कुछ नहीं है. अकाल ने घेर रखा है. ऐसे में पलायन के सिवाय रास्ता भी नहीं है. प्रतिनिधि, मेदिनीनगर.विश्वनाथ राम को पता है कि पंचायत चुनाव हो रहे हैं. वोट भी डालने की इच्छा है. गांव की सरकार चुनने में जो भागीदारी एक आम आदमी की होनी चाहिए, उसे निभाने की इच्छा तो प्रबल है, पर वह मजबूर भी है. विश्वनाथ का कहना है कि यदि इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभायेंगे, तो घर में खाने के लाले पड़ जायेंगे. अकाल पड़ गया है. राहत का कोई कार्य नहीं चल रहा है. ऐसे में रोजगार के लिए बाहर जाने के अलावा उनलोगों के पास कोई विकल्प नहीं है. बगल के राज्य बिहार में जा रहे हैं. वहीं धनकटनी करेंगे. इससे इतना मिल जाता है कि सात-आठ माह खाने के लिए सोचना नहीं पड़ता. विश्वनाथ चैनपुर प्रखंड लिधकी गांव का रहने वाला है. शुक्रवार को वह कोयल नदी पार कर गाड़ीखास गांव के पास एनएच-75 पर खड़ा था. विश्वनाथ अकेले नहीं, बल्कि लिधकी पतरिया गांव के कई महिला-पुरुष थे, जो धनकटनी के लिए जा रहे थे. जब बात हुई पंचायत चुनाव की, तो सभी एक सुर में कहने लगे कि मालूम है पंचायत चुनाव है, पर क्या करें. वोट देने आयेंगे, इस सवाल पर वे लोग कहने लगे कि यदि कोई खर्चा देकर बुलायेंगे, तब सोचेंगे. स्वेच्छा से वे लोग नहीं आने वाले हैं. क्योंकि यदि वह वोट के चक्कर में रहेंगे, तो पूरे साल खाने को लाले पड़ जायेंगे. राजेश्वर राम का कहना है कि अभी गरीबों के हिमायती सभी लोग बनते हैं. चुनाव तक दाना-पानी, दारू भी मिलेगा. लेकिन चुनाव के बाद कोई आता नहीं. गरीब के बेटा के नाम पर विधानसभा चुनाव में ही वोट दिये हैं. पर कोई नहीं आता है दुख- दर्द सुनने. इसलिए वे लोग इच्छा मार कर ही सही, बाहर कमाने जा रहे हैं. यह स्थिति केवल लिधकी पतरिया गांव की ही नहीं है, बल्कि कई इलाकों में ऐसी स्थिति है. चुनाव पर पेट का सवाल ही भारी पड़ रहा है. विश्वनाथ के अलावा पलायन करने वाले मजदूरों के समूहों में कमल राम, ज्वाला राम, सकेंद्र भुइयां, अवधबिहारी सिंह, विक्रम राम सहित काफी संख्या में लोग शामिल थे.

Prabhat Khabar Digital Desk
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