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कारगिल युद्ध : दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हुए थे पलामू के युगंबर दीक्षित

Updated at : 26 Jul 2019 6:06 AM (IST)
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कारगिल युद्ध : दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हुए थे पलामू के युगंबर दीक्षित

मेदिनीनगर : कारगिल युद्ध में पलामू के सपूत युगंबर दीक्षित दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे. युगंबर दीक्षित की तैनाती कारगिल के टाइगर हिल में थी. इसी दौरान वह 23 जून 1999 को शहीद हो गये थे. शहीद युगंबर दीक्षित मूल रूप से पलामू के भदुमा गांव के रहने वाले थे. शहादत […]

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मेदिनीनगर : कारगिल युद्ध में पलामू के सपूत युगंबर दीक्षित दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे. युगंबर दीक्षित की तैनाती कारगिल के टाइगर हिल में थी. इसी दौरान वह 23 जून 1999 को शहीद हो गये थे. शहीद युगंबर दीक्षित मूल रूप से पलामू के भदुमा गांव के रहने वाले थे. शहादत के दो साल पहले यानी 1997 में उनकी शादी उषा दीक्षित के साथ हुई थी. जब युगंबर दीक्षित की शहादत हुई, उस समय उनकी पत्नी गर्भवती थी. लगभग एक महीने बाद उन्होंने पुत्र को जन्म दिया. पुत्र का नाम युद्धजय दीक्षित है.
युद्धजय अभी इंटर साइंस की पढ़ाई कर रहा है. युद्धजय के मन में भी देश प्रेम की भावना है. वह भी सेना में जाकर अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करना चाहता है. युद्धजय का कहना है कि उसे इस बात का गर्व है कि उसके पिता ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है. शहीद का बेटा होने का उसे गर्व है. शहीद युगंबर दीक्षित की पत्नी उषा दीक्षित अपने बच्चों के साथ मेदिनीनगर के बैरिया में 20 साल पुराने आवास में रहती है.
कई वादे अभी तक नहीं हुए पूरे : बताया जाता है कि शहादत के वक्त जो घोषणाएं सरकार के स्तर से की गयी थीं, उसमें कई वादे अभी भी अधूरे रह गये हैं. घर बनाने के लिए साढ़े 12 डिसमिल के बजाय साढ़े चार डिसमिल जमीन मेदिनीनगर-रांची मार्ग पर पोलपोल के पास दी गयी. इसके अलावा शहीद के परिजनों को कृषि के लिए पांच एकड़ जमीन, जीविका के लिए पेट्रोल पंप के साथ-साथ डालटनगंज रेलवे स्टेशन का नाम शहीद युगंबर दीक्षित के नाम पर करने की घोषणा की गयी थी, लेकिन ये वादे अभी तक पूरे नहीं हुए.
कर्मों में भी सम्मान का भार झलकना चाहिए : वृजेश पूर्व सैनिकों के हितों की लड़ाई लड़ने वाले पूर्व सैनिक वृजेश शुक्ला का कहना है कि शहीदों के प्रति सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी सम्मान का भाव झलकना चाहिए. प्रशासनिक स्तर से कारगिल शहीदों के लिए कुछ काम हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है. शहीदों के सम्मान दिये जाने से समाज में एक बेहतर वातावरण तैयार होता है.
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