पाकुड़ नगर. पाकुड़ बीएड कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में बाल विवाहमुक्त भारत–100 दिवसीय अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की विस्तृत जानकारी दी गयी. इसमें बाल विवाह को दंडनीय अपराध बताते हुए इसके कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला गया. इसके पश्चात स्वयंसेवकों द्वारा बाल विवाह पर आधारित एक प्रभावशाली लघु नाटक प्रस्तुत किया गया. नाटक के माध्यम से बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक दुष्प्रभावों को भावनात्मक ढंग से दर्शाया गया, जिसने उपस्थित छात्र-छात्राओं को गहराई से प्रभावित किया. नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह न केवल कानून के विरुद्ध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय भी है. इसके अलावा पोस्टर एवं स्लोगन के माध्यम से भी जागरूकता संदेश प्रसारित किए गए. कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजय कुमार ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य पर लगाया गया विराम है. उन्होंने कहा कि बच्चे सीखने और आगे बढ़ने के लिए बने हैं, न कि कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ उठाने के लिए. डॉ कुमार ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार व समाज में भी इस विषय पर चेतना फैलाएं. उन्होंने कहा कि सही समय पर उठाया गया एक कदम, पूरे जीवन को अंधकार से बचा सकता है.
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