कश्मीर में बर्फबारी में पाकुड़ का जवान शहीद

Updated at : 08 Apr 2017 10:31 AM (IST)
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कश्मीर में बर्फबारी में पाकुड़ का जवान शहीद

पाकुड़: जम्मू-कश्मीर में लद्दाख क्षेत्र के बटालिक सेक्टर में कई बार हिमस्खलन होने से झारखंड के तीन सैनिक शहीद हो गये. शहीदों में पाकुड़ के लांस नायक बिहारी मरांडी, इटकी के हवलदार प्रभु तिर्की और मांडर के जवान कुलदीप लकड़ा हैं. सैन्य अधिकारी ने बताया कि अप्रत्याशित बर्फबारी से बटालिक सेक्टर में कई बार हिमस्खलन […]

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पाकुड़: जम्मू-कश्मीर में लद्दाख क्षेत्र के बटालिक सेक्टर में कई बार हिमस्खलन होने से झारखंड के तीन सैनिक शहीद हो गये. शहीदों में पाकुड़ के लांस नायक बिहारी मरांडी, इटकी के हवलदार प्रभु तिर्की और मांडर के जवान कुलदीप लकड़ा हैं. सैन्य अधिकारी ने बताया कि अप्रत्याशित बर्फबारी से बटालिक सेक्टर में कई बार हिमस्खलन हुआ, जिससे सैन्य चौकी बर्फ के नीचे दब गयी. पांच सैनिक बर्फ के नीचे दब गये. उनमें से दो को निकाल लिया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी अन्य तीन सैनिकों को बचाया नहीं जा सका. उनके शव बरामद कर लिये गये हैं. इस बीच काकसार सेक्टर में भी सैन्य चौकियां हिमस्खलन की चपेट में आयी. मामले में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है.

पाकुड़ के रामनाथपुर गांव का रहनेवाला था बिहारी मरांडी : शहीदों में एक बिहारी मरांडी पाकुड़ जिला के हिरणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामनाथपुर गांव के रहनेवाले थे. परिजनों को इसकी जानकारी गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे फोन से मिली. खबर मिलते ही पूरे घर में मातम छा गया. परिजनों के मुताबिक वह हरदिल अजीज था. चार भाइयों में वह तीसरे नंबर पर थे. इस साल परिजन उशकी शादी करना चाहते थे. उसके तीन भाई अर्द्धसैनिक बल में हैं.

सरल स्वभाव के थे नाइकी : शहीद जवान नाइकी बिहारी मरांडी तीनपहाड़ के मुरली मिशन से मैट्रिक की परीक्षा पास की़ बाद में साहिबगंज कॉलेज से इंटर व इग्नू से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद फौज में चले गये. वे जब भी छुट्टी में गांव आते थे, लोगों को देशभक्ति व देश सेवा की कहानियां बताते थे. उनके शहीद होने से परिजन ही नहीं, पूरे गांव के लोग शोकाकुल हैं.

इटकी के समेरा में पसरा मातम : बर्फबारी में शहीद जवानों में इटकी थाना क्षेत्र के सेमरा गांव निवासी प्रभु सहाय तिर्की (45) भी शामिल हैं. शुक्रवार को परिजनों को यह मनहूस खबर मिली. हालांकि देर शाम तक उनकी मां बिरजमनी तिर्की को घटना की जानकारी नहीं दी गयी है. पड़ोसी सांत्वना देने घर पहुंचने लगे. इटकी पुलिस ने आठ अप्रैल को शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की बात कही है. 21 बिहार बटालियन के जवान प्रभु सहाय तिर्की हवलदार के पद पर कार्यरत थे. पांच भाई- बहनों में वह दूसरे नंबर पर थे. बड़े भाई मनीष व छोटे भाई जॉन सलील तिर्की ने बताया कि वर्ष 1994 में वह दानापुर कैंट में नियुक्त हुए थे. उनकी शुरुआती पढ़ाई इटकी के संत स्टीफेन स्कूल व बाद में रांची के ऑक्सफोर्ड स्कूल में हुई थी. उनके पिता सुनील तिर्की की मौत हो चुकी है. प्रभु सहाय की शादी 15 वर्ष पहले जोन्हा के खेरवा कोचा गांव की सुचिता तिर्की के साथ हुई थी. पत्नी सुचिता अपने दोनों पुत्रों के साथ रांची के लोवाडीह में किराये के एक मकान में रहती है. 11 वर्षीय पुत्र अक्षय अंकित व नौ वर्षीय पुत्र अनिश अंकित सैनिक स्कूल में पढ़ते हैं.

शहीद कुलदीप के परिवार को बेटे पर नाज

शहीद कुलदीप लकड़ा (22) मांडर के बिसाहाखटंगा जोल्हा टोली के रहनेवाले थे. उनके पिता जेवियर लकड़ा को अपने इकलौते पुत्र की शहादत पर गर्व है. उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा पुत्र देश सेवा में लगा था और शहीद हुआ है. वह घर का इकलौता बेटा था. उसकी तीन बहनें हैं. उसके दुनिया से चले जाने के बाद उनके परिवार को कोई देखनेवाला नहीं बचा. कुछ ऐसी ही कहना था कुलदीप की बड़ी बहन सेलिन लकड़ा का उसने कहा कि उसका भाई देश के लिए शहीद हुआ है, जिस पर उसके परिवार को नाज है. कुलदीप ने न सिर्फ परिवार का नाम ऊंचा किया है, बल्कि अपने गांव व राज्य का नाम भी रोशन किया है.

जून में होनेवाली थी शादी

कुलदीप लकड़ा की जून में शादी होनेवाली थी. उसके शहीद होने की सूचना मिलने पर जोल्हाटोली आयी उसकी मंगेतर अनिता बेक ने बताया कि चार अप्रैल को उसकी फोन पर कुलदीप से बात हुई थी, तब उसने कहा था कि सब ठीक है. मैं मई के आखिरी या फिर जून के पहले सप्ताह में छुट्टी पर घर आऊंगा, इसके बाद हमारा लोटा-पानी हो जायेगा, तुम अपना ख्याल रखना. अनिता बेक के अनुसार, गुमला के एक तीर्थस्थल में मुलाकात के बाद 2013 से कुलदीप से उसकी जान-पहचान थी और उनकी शादी भी होने वाली थी.

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