मारपीट का मामला दर्ज

Updated at : 08 Jun 2016 5:33 AM (IST)
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मारपीट का  मामला दर्ज

हिरणपुर : थाना क्षेत्र के फतेहपुर में जमीनी विवाद को लेकर मारपीट का मामला प्रकाश में आया है. मामले को लेकर गांव के ही गोर तुरी ने थाना में लिखित शिकयत देकर बागाल तुरी, कारू तुरी, निर्मल तुरी, अजीत तुरी सहित करीब 10 लोगों पर मारपीट का मामला दर्ज कराया है. बगैर पढ़ाई किये मैट्रिक […]

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हिरणपुर : थाना क्षेत्र के फतेहपुर में जमीनी विवाद को लेकर मारपीट का मामला प्रकाश में आया है. मामले को लेकर गांव के ही गोर तुरी ने थाना में लिखित शिकयत देकर बागाल तुरी, कारू तुरी, निर्मल तुरी, अजीत तुरी सहित करीब 10 लोगों पर मारपीट का मामला दर्ज कराया है.

बगैर पढ़ाई किये मैट्रिक की परीक्षा देने को मजबूर है छात्र-छात्राएं

क्या कहते हैं छात्र

वर्ग नवम के छात्र सानु हांसदा ने कहा कि विद्यालय में शिक्षक नहीं रहने के कारण गणित, विज्ञान, अंगरेजी आदि की पढ़ाई नहीं हो पा रही है. जिस कारण हम लोगों को मैट्रिक की परीक्षा में परेशानी होगी.

– सानु हांसदा

वर्ग दशम के छात्र माईकल मरांडी ने कहा कि आदिवासी बाहुल क्षेत्र में मात्र एक ही स्कूल है. वहीं स्कूल में वर्ग नवम व दशम के लिए एक भी शिक्षक का पदस्थापन नहीं किया गया है. जिस कारण हमलोगों पढ़ाई भगवान भरोसे है.

– माईकल मरांडी

वर्ग नवम की छात्रा मीरू मुर्मू ने कहा कि शिक्षा विभाग गरीबों को शिक्षा देने में नाकाम है. इसी लिए विद्यालय में शिक्षक का पदस्थापन नहीं किया जा रहा है.

– मीरू मुर्मू

वर्ग नवम की छात्रा सरोजनी मरांडी ने कहा कि शिक्षा विभाग को चाहिए कि अविलंब शिक्षक का पदस्थापन करें तभी यहां के छात्र बेहतर परिणाम दे सकेंगे.

– सरोजनी मरांडी

बीपीएल परिवार से हैं अधिकांश बच्चे

स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में वर्ग नवम में 21 बच्चे व दशम में 19 बच्चे अध्ययनरत हैं. जिसमें अधिकतर बच्चे बीपीएल परिवार से आते हैं. शिक्षक नहीं रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है. वहीं 1-8 तक के शिक्षक ही वर्ग नवम व दशम के बच्चों को पढ़ाते हैं. इसलिए मैट्रिक के परीक्षा में रिजल्ट काफी खराब हो रहा है.

क्या कहते हैं प्रधान शिक्षक

विद्यालय के प्रधान शिक्षक मंडल सोरेन ने कहा कि वर्ष 2011 में उत्क्रमित उच्च विद्यालय का दर्जा दिया गया. इसके बाद से उच्च विद्यालय के लिए एक भी शिक्षक का पदस्थापन नहीं किया गया है. जो बच्चे मैट्रिक की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं वह बच्चों की उपलब्धि है. क्योंकि यहां शिक्षक नहीं है. मध्य विद्यालय के शिक्षक ही किसी तरह शिक्षा दे रहे हैं. इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को है.

क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधीक्षक

जिला शिक्षा अधीक्षक अरूण कुमार ने बताया कि जिले में शिक्षकों की कमी है. फिर भी जिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं है. उनको शिक्षक उपलब्ध कराया जायेगा. इसके लिए सरकार का स्पष्ट रूप से निर्देश है जो मध्य या प्राथमिक विद्यालय के योग्य शिक्षक हैं उनका पदस्थापन उच्च विद्यालय में किया जा सकता है. इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से फाईल उपायुक्त को भेजना होगा. इसका निर्णय उपायुक्त ही करेंगे.

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