शिनाख्त किये बिना शव दफनाने में पुलिस ने क्यों की जल्दबाजी
Updated at : 27 Dec 2017 5:12 AM (IST)
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आक्रोश. पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 72 घंटे भी शव नहीं रख सकी पुलिस, लोगों ने कहा शव दफनाने में पुलिस की जल्दबाजी के कारण लोगों का आक्रोश बढ़ गया था. नाराजगी की वजह यह भी थी कि नदी किनारे जहां शव दफनाया गया वहां ग्रामीण स्नान करते हैं. लिट्टीपाड़ा : […]
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आक्रोश. पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 72 घंटे भी शव नहीं रख सकी पुलिस, लोगों ने कहा
शव दफनाने में पुलिस की जल्दबाजी के कारण लोगों का आक्रोश बढ़ गया था. नाराजगी की वजह यह भी थी कि नदी किनारे जहां शव दफनाया गया वहां ग्रामीण स्नान करते हैं.
लिट्टीपाड़ा : सुबह से नवाडीह व जोबोडीह के ग्रामीणों ने थाना प्रभारी राजकिशोर मिश्रा की कार्यशैली का विरोध जताते रहे थे. लिट्टीपाड़ा-गोड्डा पथ जाम कर दिया. रह-रह कर थाना प्रभारी के खिलाफ नारेबाजी की जा रही थी. घटनास्थल पुलिस की छावनी में तब्दील हाे चुकी थी. जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गयी थी व दिनभर एक भी वाहन की आवाजाही नहीं हो सकी. वाहन चालक दूसरे रास्ते से निकलने के लिए काफी परेशान दिखे. पहले तो लोगों में नदी किनारे शव दफनाने पर नाराजगी थी. लेकिन, जैसे ही मृतक के परिजन पहुंचे तो लोगों का गुस्सा और भी बढ़ गया. लोगों का आरोप था कि बगैर शिनाख्त किये पुलिस ने शव कैसे दफना दिया. पुलिस थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
एसपी शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल के निर्देश पर घटना स्थल पर एसडीपीओ श्रवण कुमार, हिरणपुर थाना प्रभारी अवधेश सिंह, मुफस्सिल थाना प्रभारी संतोष कुमार, पुलिस निरीक्षक सह अमड़ापाड़ा थाना प्रभारी बीके पांडे के अलावे महेशपुर, लिट्टीपाड़ा, नगर थाना, पाकुड़िया थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची.
मोबाइल में तसवीर देख परिजनों ने की पहचान
लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के करियोडीह पुल के निकट सड़क दुर्घटना में 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गयी थी. लिट्टीपाड़ा पुलिस ने जल्दबाजी करते हुए शव को पोस्टमार्टम कराने के बाद बिना शिनाख्त किये ही देर शाम जोबोडीह नदी के निकट दफना दिया. जिस जगह पर शव को दफनाया गया, वहां नवाडीह व जोबोडीह गांव के ग्रामीण स्नान करते हैं. बिना ग्राम प्रधान के सहमति पर पुलिस की ओर से शव को दफनाये जाने का मामला तूल पकड़ा और मंगलवार की सुबह सड़क जाम कर दिया. इस बीच थाना क्षेत्र के नवाडीह निवासी मरांगमय हेम्ब्रम भी घटना स्थल पर पहुंची और मोबाईल पर तस्वीर देख कर शव की पहचान अपने पिता हेमलाल हेम्ब्रम के रूप में किया. शव की पहचान हो जाने के बाद ग्रामीण और आक्रोशित हो गये. ग्रामीणों का कहना था कि नियमानुसार 72 घंटे तक शव के पोस्टमार्टम कराये जाने के पश्चात शव को सुरक्षित पुलिस को रखना था. पर ऐसा नहीं करते हुए शव को जैसे-तैसे दफना दिया गया.
बेटी के घर आये थे हेमलाल, गये थे दवा लेने, दुर्घटना में हो गयी थी मौत
देर रात तक नहीं पहुंचे थे घर
पत्नी ने सोचा, बेटी के घर हैं हेमलाल
बेटी ने सोचा, घर चले गये पिता
ऊहापोह में रह गये परिजन
उधर, पुलिस ने दफना दी लाश
हेमलाल की पत्नी मयबीटी मुर्मू ने बताया कि वे गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी पूरो गांव के रहने वाले हैं. हेमलाल लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के नवाडीह अपने बेटी मरांगमय हेंब्रम के घर शुक्रवार को घूमने आया था. रविवार की शाम दवा लेने के लिए वह हिरणपुर गया था. वापस लौटने के क्रम में उसकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी. घर वापस नहीं लौटने पर बेटी मरांगमय हेंब्रम यह समझ रही थी कि वह वापस अपने घर सुंदरपहाड़ी चला गया है.
जबकि, सुंदरपहाड़ी में परिजन यह समझ रहे थे कि वह बेटी के घर में ही है. मंगलवार को नदी किनारे शव को दफना दिये जाने के विरोध में जब ग्रामीणों ने सड़क जाम किया तो इसकी जानकारी घरवालों को मिली. जाम स्थल पर ही किसी ने मोबाइल पर मृतक का फोटो दिखाया. जिसके बाद उसकी पहचान हो पायी. मृतक की पत्नी ने पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया व कड़ी कार्रवाई की मांग की.
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