झारखंड : सरीना ने कहा, शौचालय बन गये, अब डीप बोरिंग से पानी दें, तो सीएम ने कहा, 2022 तक सभी घरों में होगी पाइप लाइन से आपूर्ति

Updated at : 05 Dec 2017 9:04 AM (IST)
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झारखंड : सरीना ने कहा, शौचालय बन गये, अब डीप बोरिंग से पानी दें, तो सीएम ने कहा, 2022 तक सभी घरों में होगी पाइप लाइन से आपूर्ति

पाकुड़ : मुख्यमंत्री रघुवर दास सोमवार को पाकुड़ में थे. बाजार समिति परिसर में बजट पूर्व संगोष्ठी में उन्होंने अगले साल के बजट को लेकर आम लोगों से सुझाव मांगे. कार्यक्रम में पहुंची पाकुड़ की सरीना बीबी ने मुख्यमंत्री से पानी की समस्या का समाधान करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, सरकार ने शौचालय का […]

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पाकुड़ : मुख्यमंत्री रघुवर दास सोमवार को पाकुड़ में थे. बाजार समिति परिसर में बजट पूर्व संगोष्ठी में उन्होंने अगले साल के बजट को लेकर आम लोगों से सुझाव मांगे. कार्यक्रम में पहुंची पाकुड़ की सरीना बीबी ने मुख्यमंत्री से पानी की समस्या का समाधान करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, सरकार ने शौचालय का निर्माण तो करा दिया. अब पानी की व्यवस्था जरूरी है.
यदि डीप बोरिंग से पानी की भी व्यवस्था करा दी जाये, तो काफी हद तक सारी समस्याओं का समाधान हो जायेगा. मुख्यमंत्री ने सरीना के प्रस्ताव को गंभीरता से लिया. मौके पर ही पीएचइडी के अधिकारियों को निर्देश दिया कि शौचालयों में कैसे पानी पहुंचे, इस पर वर्कआउट करें. प्रस्ताव तैयार करें. कहा : 2022 तक सभी घरों में पाइप लाइन से पानी पहुंचेगा.
सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है. झारखंड में 2020 तक सभी गरीबों का अपना घर होगा.विकास से समझौता नहीं : मुख्यमंत्री ने कहा, आदिम जनजाति व आदिवासी समाज के विकास से कोई समझौता नहीं होगा. अधिकारी बैठकर कुर्सी ना तोड़ें. जनता के लिए कानून का सरलीकरण होना चाहिए. आदिम जनजाति गांव को सड़क से जोड़ने की प्राथमिकता बजट में होनी चाहिए.
डीसी पिछड़े प्रखंड व पंचायत को चिह्नित कर प्लानिंग तैयार करें. बजट में लोगों को क्या चाहिए, ये उनसे बेहतर कोई नहीं बता सकता. पैसा जनता का है, इसलिए ये बताने का हक भी जनता का ही है कि वे बजट कैसा चाहते हैं.
विकास में बाधक हैं कुछ नेता : मुख्यमंत्री ने कहा : पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा में पिछले साल बजट पूर्व संगोष्ठी में आदिम जनजाति की महिलाओं ने मीलों पैदल चल कर झरना व पहाड़ से पानी लाने की बात कही थी.
इसके बाद सरकार ने राज्य की सबसे बड़ी 218 करोड़ की लागत से पेयजलापूर्ति योजना लिट्टीपाड़ा के लिए स्वीकृत की. काम की शुरुआत तो हो गयी है, पर कुछ लोग सरकारी कार्य में बाधा पहुंचा रहे हैं. कुछ राजनीतिक दल के नेता लोगों को बरगलाते हैं. विकास में बाधक बनते हैं. हमने पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि चाहे कितना बड़ा नेता ही क्यों न हो, सख्ती से कानूनी कार्रवाई करें. सुंदर पहाड़ी में पहाड़िया के घर अनाज नहीं पहुंचने के मामले में गोड्डा के अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधि सुभाष की शिकायत पर सीएम ने वहां के डीसी भुवनेश प्रताप सिंह को फटकार लगायी. दोषी को निलंबित करने का निर्देश दिया.
पाकुड़ में बजट पूर्व संगोष्ठी, सीएम ने सुने लोगों के सुझाव
सीएम ने कहा
शौचालयों में पानी कैसे पहुंचे, वर्कआउट करें अधिकारी
हर गांव में ग्रामीण विकास क्लब, अध्यक्ष को 8000 रुपये
2020 तक हर गरीब का होगा अपना घर
तेजस्विनी योजना से 14 से 20 वर्ष की लड़कियों को जोड़ा जायेगा
कार्यक्रम में थे : कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह, मंत्री डॉ लुइस मरांडी, विधायक अनंत ओझा, ताला मरांडी, मुख्य सचिव राजाबाला वर्मा और पाकुड़, साहिबगंज, गोड‍्डा, दुमका, देवघर व जामताड़ा के डीसी, एसपी सहित अन्य अधिकारी
ग्रामीण िवकास क्लब के जरिये मॉनीटरिंग
कार्यक्रम में बजट को लेकर कई सुझाव मिले. मुख्यमंत्री ने भी सबों के विचार सुने. कहा : गांव के विकास के लिए हर गांव में ग्रामीण विकास क्लब का गठन किया जायेगा. इस क्लब के अध्यक्ष को 8000 रुपये मानदेय दिया जायेगा. क्लब के जरिये ग्रामीण विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन और मॉनीटरिंग होगी. उन्होंने कहा : सरकार ने निर्णय लिया है कि तेजस्विनी योजना से 14 से 20 वर्ष की लड़कियों को जोड़ा जायेगा. इन लड़कियों को कौशल विकास के जरिये प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जायेगा. इसके लिए सरकार ने काम शुरू कर दिया है. दिसंबर तक 60 ग्रिड व 250 सबग्रिड बन कर तैयार हो जायेंगे. इससे लोगों को निर्बाध बिजली मिलेगी.
गरीबी पर राजनीति नहीं
उन्होंने कहा : हमारी सरकार गरीबी पर राजनीति नहीं करती. अंत्योदय का विचार रखनेवाली सरकार है. पाकुड़ देश के 30 पिछड़े जिलों में शामिल है. इसलिए इस बार पाकुड़ में ही बजट बना रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, भ्रष्टाचार समाप्त करने को लेकर ही अब सरकार डीबीटी के माध्यम से भुगतान कर रही है. ई-पॉश मशीन के माध्यम से लोगों को राशन मुहैया कराया जा रहा है. इस व्यवस्था से सरकार को 225 करोड़ रुपये की बचत हुई है. 2014 तक 38 हजार 940 स्कूलों में से मात्र सात हजार में ही बेंच-डेस्क की व्यवस्था थी. परंतु तीन साल में सरकार ने 32 हजार स्कूलों में बेंच-डेस्क दिये हैं.
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