बाल विवाह नहीं करने और समाज को जागरूक करने की शपथ ली

बाल विवाह नहीं करने और समाज को जागरूक करने की शपथ ली
सेन्हा़ बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से उपायुक्त डॉ कुमार ताराचंद के निर्देश पर सेन्हा प्रखंड मुख्यालय से एक जागरूकता रथ को रवाना किया गया. बीडीओ और सीओ ने संयुक्त रूप से रथ को हरी झंडी दिखायी, जो अब क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में घूमकर लोगों को जागरूक करेगा. कानूनी अपराध है बाल विवाह : जागरूकता रथ के माध्यम से ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि संविधान के अनुसार विवाह के लिए लड़कों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़कियों की 18 वर्ष निर्धारित है. इससे कम उम्र में विवाह करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य की दृष्टि से भी हानिकारक है. प्रशासन ने चेताया कि निर्धारित उम्र से पहले विवाह कराने वाले माता-पिता पर आर्थिक दंड के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है. पढ़ाई-लिखाई है बच्चों का अधिकार : मौके पर प्रखंड व अंचल कर्मियों ने बाल विवाह नहीं करने और समाज को जागरूक करने की शपथ ली. अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि बच्चे-बच्चियों को पढ़ाई-लिखाई कर अपना भविष्य संवारने का पूर्ण अधिकार है. जागरूकता रथ गुरुवार से ही प्रखंड की सभी पंचायतों व गांवों का दौरा कर रहा है. इस मौके पर त्रिवेणी भगत, अजय कुमार वर्मा, डॉली तिर्की, वंदना कच्छप, संदीप रजक, सुजीत उरांव, विशाल सिंह, नितशिखा तिर्की, रामकुमार मिश्रा, अजहरुद्दीन अंसारी, आशुतोष पाठक और संगीता गाड़ी सहित अन्य प्रखंड व अंचल कर्मी उपस्थित थे.
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