लोहरदगा प्रीमियर लीग बना जिले की शान, खेल के साथ बढ़ा जोश

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लोहरदगा प्रीमियर लीग बना जिले की शान, खेल के साथ बढ़ा जोश

लोहरदगा जिले में पहली बार आयोजित लोहरदगा प्रीमियर लीग ने लोगों के बीच खेल के प्रति जबरदस्त उत्साह पैदा किया है.

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लोगों ने कहा, युवाओं को मिला बड़ा मंच फोटो. घाना ठाकुर, जयश्री उरांव, मुकूल देवघरिया, बटुक उरांव, विरंजित मिंज,सहदेव उरांव लोहरदगा. लोहरदगा जिले में पहली बार आयोजित लोहरदगा प्रीमियर लीग ने लोगों के बीच खेल के प्रति जबरदस्त उत्साह पैदा किया है. फुटबॉल के मैदानों में उमड़ रही भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन जिले के लोगों के दिलों में खास जगह बना चुका है. प्रतियोगिता ने न सिर्फ खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है, बल्कि लोगों के बीच सामाजिक एकता, सामूहिकता और स्थानीय गौरव की भावना को भी मजबूत किया है. स्टेडियम से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह इसकी चर्चा हो रही है. इस संबंध में लोगों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है. सहदेव उरांव ने कहा कि लोहरदगा प्रीमियर लीग युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है. पहले जिले के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता था, लेकिन अब यह मंच उन्हें पहचान दिला रहा है. खेल को लेकर जो जुनून दिख रहा है, वह जिले के भविष्य के लिए शुभ संकेत है. घाना ठाकुर ने कहा कि इस लीग ने युवाओं को खेल से जोड़ने का काम किया है. अब बच्चे मोबाइल या टीवी से दूर होकर मैदान की ओर रुख कर रहे हैं. खेल अनुशासन, सहयोग और आत्मविश्वास सिखाता है.जयश्री उरांव ने कहा कि लोहरदगा प्रमियर लीग से जिले में रौनक बढ़ी है. मैच के दौरान मैदान के आसपास की दुकानों, होटलों और ठेलों की बिक्री बढ़ी है. ऐसे आयोजन जिले की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है. साथ ही खेल के माध्यम से जिले की पहचान राज्य स्तर पर बन रही है.मुकुल देवघरिया ने कहा कि एक समय था जब लोहरदगा में खेल सुविधाएं सीमित थीं. लेकिन आज यह लीग यह दिखा रही है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों की कमी भी बाधा नहीं बनती. खिलाड़ियों का जोश देखकर लगता है कि जिले में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. बटुक उरांव ने बताया कि लोहरदगा प्रीमियर लीग सिर्फ खेल का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का पर्व है. गांवों और शहरों के लोग एक साथ जुड़ रहे हैं, युवा टीम भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं.यह आयोजन हर वर्ग के लोगों को एक मंच पर ला रहा है. विरंजित मिंज का कहना है कि अगर इस तरह के आयोजन हर साल होते रहें, तो लोहरदगा न केवल खेल के क्षेत्र में बल्कि सामुदायिक सहभागिता में भी एक मिसाल बन जायेगी.

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Vikash Nath

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