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रंग ला रही मेहनत : ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने व नये तालाबों से बेहतर खेती कर रहे हैं किसान

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
किस्को प्रखंड के किसान खेती कर आत्मनिर्भर होंगे
किस्को प्रखंड के किसान खेती कर आत्मनिर्भर होंगे
प्रतीकात्मक तस्वीर

लोहरदगा : जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में सिंचाई की बेहतर सुविधा नहीं होने के बावजूद किस्को एवं भंडरा प्रखंड क्षेत्र के किसान नदियों, तालाबो से सिंचाई कर बेहतर खेती कर रहे हैं. ये किसान पहले तो सरकारी अधिकारियों के पास सिंचाई सुविधा की व्यवस्था करने को लेकर फरियाद की, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया. थक हार कर किसानों ने परंपरागत व्यवस्था से ही अपने फसलों की सिंचाई करने लगे. आज प्राचीन तालाब से खेतों की सिंचाई कर बेहतर फसल उपजा रहे हैं.

कुछ पुराने और कुछ नये तालाब आज समृद्धि का प्रतीक बन गया है. किस्को प्रखंड क्षेत्र के खरकी पंचायत के भालू डूबा बांध, हिसरी पंचायत के तालाब में सालों भर पानी भरा रहता है. जिस कारण क्षेत्र में जलस्तर काफी ऊपर देखने को मिलती है. गांव में 15 से 20 फीट के कुएं में गर्मियों में भी पानी देखने को मिलता है. परहेपाठ पंचायत के जनवल गांव के पोगड़ो बांध एवं जोरी के तालाब में भी पानी रहने के कारण क्षेत्र के कुआं में जलस्तर बना रहता है.

क्षेत्र के किसान काफी संख्या में गेंहू का फसल लगाते हैं. अच्छी खेती होती है. लोगों द्वारा तालाब का उपयोग सिंचाई के अलावा अन्य कार्यों के लिए भी किया जाता है. कपड़े धोने एवं अन्य प्रकार के रोजमर्रा के कार्यों के लिए पानी का उपयोग करते हैं. साथ ही मछली पालन भी होता है. अगर इन तालाबों का सुंदरीकरण करा दी जाये एवं तालाब को गढ़ा कर दिया जाय तो क्षेत्र के लोगो के साथ साथ जल संचयन के लिए बेहतर होगा.

प्रशासन द्वारा जल संचयन के उद्देश्य से किस्को प्रखंड में 2019-20 एवं 2020-21 में 192 तालाब निर्माण कराये गये हैं. जल संचयन के लिए वरदान साबित हो रहे हैं. ग्रामीण जगदेव उरांव, देवानन्द साहू एवं अन्य किसानों का कहना है कि क्षेत्र के पोगड़ो बांध एवं भालू डूबा बांध के साथ अन्य तालाब का मरम्मत कर दी जायेगी, तो जल संचयन के साथ-साथ लोग बड़ी पैमाने पर खेती भी करेंगे साथ ही पानी का जलस्तर भी बना रहेगा.

भंडरा प्रखंड में जल संचयन के लिए तालाब सबसे अच्छा जल संचयन का माध्यम बन गया है. सरकार द्वारा जल संचयन के लिए तालाब का नवनिर्माण एवं जीर्णोद्धार किया जा रहा है. जिससे तालाब में जल संचयन हो रहा है. जल संचयन से जलस्तर बना हुआ है. जिस तरह डीप बोरिंग कर धरती से जल निकालने का काम किया जा रहा है, वैसी परिस्थिति में तालाब जल संचयन में कारगर साबित हो रहा है.

दूसरी तरफ तालाब से कृषि कार्य भी हो रहा है. कृषि कार्य में तलाब से सबसे ज्यादा पानी किसानों को उपलब्ध हो रहा है. प्रखंड क्षेत्र के सभी गांव में एक दो या इससे भी अधिक तालाब है. जिसमें वर्षा जल संचयन होता है. किसान तालाबों से खेती की सिंचाई कर कृषि कार्य करते हैं. तालाब से अन्य कई काम भी होता है. जिसमें ग्रामीण स्तर पर लोगों के नहाने धोने, पालतू पशुओं के जल का प्रबंधन, मछली पालन भी तालाबों में किया जाता है.

भंडरा प्रखंड में अखिलेश्वर धाम तालाब, पांडेय बांध, नवा पोखर, सहित अन्य कई तालाब है. जिससे सिंचाई होता है एवं लोग अपने अन्य जरूरतों का काम भी करते हैं. सरकारी स्तर पर प्रखंड क्षेत्र के सभी सरकारी तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है. जीर्णोद्धार के बाद सभी तालाबों का जल संचयन क्षमता बढ़ी है. इस वर्ष वर्षा अच्छा होने से सभी तालाबों में पानी भरा हुआ है. मछली पालन सहित कृषि कार्य इन तालाबों से हो रहा है.

Posted By : Sameer Oraon

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