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अनुसंधान की छोटी चूक से बच निकलते हैं अपराधी : नीरजा आसरी

Updated at : 02 Feb 2026 10:42 PM (IST)
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अनुसंधान की छोटी चूक से बच निकलते हैं अपराधी : नीरजा आसरी

अनुसंधान की छोटी चूक से बच निकलते हैं अपराधी : नीरजा आसरी

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लोहरदगा़ सिविल कोर्ट परिसर स्थित सभागार में सोमवार को ””””मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन”””” विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो अधिनियम, जूविनाइल जस्टिस एक्ट और बाल कल्याण समिति के कार्यों के प्रति संबंधित विभागों को संवेदनशील बनाना और उनकी कार्यक्षमता में सुधार लाना था. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ डीजे द्वितीय नीरजा आसरी, डालसा सचिव राजेश कुमार, एसडीपीओ वेदांत शंकर और बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कुंती साहू, डाॅ पैरिंता कुजूर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. अनुसंधान में गंभीरता अनिवार्य : स्पेशल कोर्ट (महिला अपराध) की डीजे द्वितीय श्रीमती नीरजा आसरी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि पॉक्सो से जुड़े मामले अत्यंत संवेदनशील होते हैं. उन्होंने जांच अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी कि वे जब्ती सूची बनाने से लेकर गवाही देने तक की प्रक्रिया में पूर्ण सावधानी बरतें. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अनुसंधान में छोटी-छोटी कमियों के कारण आरोपी अक्सर कानून की पकड़ से छूट जाते हैं, जिससे उनका साहस बढ़ता है और समाज के लिए खतरा पैदा होता है. साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और उन्हें सही ढंग से न्यायालय में प्रस्तुत करना न्याय प्रक्रिया की पहली शर्त है. पुलिस को सख्त निर्देश : किस्को एसडीपीओ वेदांत शंकर ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि पॉक्सो मामले की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करें और किसी भी स्तर पर मामले को खुद सुलझाने का प्रयास न करें. उन्होंने एफआइआर, मेडिकल जांच, घटनास्थल के निरीक्षण और साक्ष्य संकलन की बारीकियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने जोर दिया कि पीड़ित का मेडिकल परीक्षण जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य नष्ट न हों. कानूनी प्रावधान और दंड : डालसा सचिव राजेश कुमार ने जेजे एक्ट और बाल कल्याण समिति की कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की देखरेख करने वाली सभी संस्थाओं का पंजीकरण जेजे एक्ट की धारा 42 के तहत अनिवार्य है. पंजीकरण न होने की स्थिति में एक साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. उन्होंने ””””सेक्सुअल असॉल्ट”””” और ””””सेक्सुअल हैरेसमेंट”””” के बीच के कानूनी अंतर को स्पष्ट करते हुए संबंधित धाराओं और सजा के बारे में बताया. डालसा सचिव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य जिला स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही को शून्य करना है. चिकित्सक ने चिकित्सीय जांच की तकनीकी जानकारी बतायी : सदर अस्पताल की चिकित्सक ने चिकित्सीय जांच की तकनीकी जानकारी साझा की, इसके बाद प्रश्नोत्तरी सत्र में अनुसंधानकर्ताओं की शंकाओं का समाधान किया गया. मौके पर एपीपी सुमन कुमार, थानों के अनुसंधानकर्ता, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष, सदस्य, सदर अस्पताल के चिकित्सक, पैनल अधिवक्ता और पीएलवी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे.

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SHAILESH AMBASHTHA

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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