शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 से

शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 से
लोहरदगा़ आस्था और शक्ति की साधना का महापर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रहा है. यह आध्यात्मिक उत्सव 27 मार्च, शुक्रवार तक श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया जायेगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में मां दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जायेगी. कलश स्थापना के साथ होगा आगाज : पंडित अखिलेश मिश्रा के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना के साथ पर्व का शुभारंभ होगा. इसके पश्चात क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जायेगी. शास्त्रों में वर्णित है कि इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से भक्तों को सुख, शांति और विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है. भारतीय नववर्ष और पौराणिक महत्व : चैत्र नवरात्र न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय नवसंवत्सर (नववर्ष) और वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी. साथ ही, देवताओं की प्रार्थना पर मां दुर्गा ने इसी समय अवतार लेकर महिषासुर का वध किया था, जिसकी स्मृति में शक्ति की उपासना की जाती है. संयम और आत्मशुद्धि का काल : नवरात्र के दौरान श्रद्धालु उपवास रखकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष विधान है, जो नारी शक्ति के सम्मान को दर्शाता है. पंडित मिश्रा ने बताया कि यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम है. सच्चे मन से की गयी साधना से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि के द्वार खुलते हैं.
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