लोहरदगा में इन दो जिलों को जोड़ने वाली पुलिया टूटी, आवागमन में लोगों को हो रही परेशानी
टूटी पुल की तस्वीर
लोहरदगा के कैरो प्रखंड में हनहट-मदरसा सड़क की पुलिया छह महीने से टूटी है, जिससे दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को 20 किमी का लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है.
लोहरदगा : लोहरदगा जिला के कैरो प्रखंड अंतर्गत हनहट-मदरसा सड़क मनोकामना शिद्ध बाबा भोलेनाथ मंदिर के समीप कोयल नदी में बना पुल छः से सात माह पूर्व टूट चुका है. हनहट-मदरसा सड़क इस क्षेत्र के लिए एक ऐसी लाइफलाइन है जिसके सहारे सढ़ाबे, टाटी, खरता, चाल्हो, डुमरटोली, गिलितगढ़, हुदू से लेकर कुडू प्रखंड क्षेत्र के रानीटोंगरी, ककरगढ़, ललमटिया, टोडांग और रांची जिला अंतर्गत चान्हो प्रखण्ड क्षेत्र के मदरसा, पंडरी, लापुर, चीरना, महूगांव सहित दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां के किसान, छात्र-छात्रा, मरीज, व्यवसायी, शिक्षक, चिकित्सक, पुलिस, प्रसासन जनप्रतिनिधियों को राजकीय राजमार्ग तक आने जाने का यह एक सड़क है, जिससे होकर प्रतिदिन हजारों निजी और सवारी गाड़ियों का आना जाना होता है.
पुल टुटने से 20 किमी दूरी तय करनी पड़ती है
किंतु तत्तकालीन समय मे महज 6 किलोमीटर राजमार्ग तक जाने के लिए टाटी, ख़रता,चाल्हो, सढाबे के ग्रामीणों को 20 किमी दूरी तय करनी पड़ती है. क्षेत्र के ग्रामीण सुसेन महतो, बहादुर उरांव, बजरंगी यादव, सुजेश दुबे, इंतखाब आलम, बसंत महतो, विवेक शुक्ल, सीमा भगत, अताउल्लाह अंसारी, विकास भगत, सनाउल अंसारी, राजकुमार टाना भगत सहित सैकड़ों ग्रामीणों का कहना है कि चाहे परिस्थिति अच्छी हो या बुरी, फसल बेचने जाना हो या मरीज को इलाज करवाने, बच्चों को कॉलेज जाना हो या नौकरी पेशा वाले को अपनी ड्यूटी जाना हो, सबके लिए यह पुलिया खास था.
मरीजों को होती है सबसे अधिक दिक्कत
इतना ही नहीं राजस्व के हिसाब से भी सोचे तो प्रतिदिनों लाखों रुपये का कारोबार इस सड़क के माध्यम से किया जाता है बावजूद इसके पुलिया को लेकर कोई ठोस पहल नही हुआ है. सबसे दिक्कत तो तब हो जाती है जब कोई मरीज को एक से दो घण्टे में अस्पताल ले जाकर बचाया जा सकता हो किन्तु हनहट से मदरसा मुख्य सड़क 6 किमी के जगह 20 किमी दूरी तय करनी पड़ती है जिसके लिए 2 घंटे का समय लग जाता है जिससे मरीज की स्थिति तक गंभीर बन जाती है, ऐसा ही हाल क्षेत्र के किसानों को अपनी उत्पाद बेचने के लिए परेशानी हो जाती है.परन्तु पांच से छः माह गुजर जाने के बाद भी टुटे पुल के लिए कोई ठोस पहल नही दिख रही है.प्रसासन व जनप्रतिनिधियों के उदासीनता रवैया से ग्रामीण काफी दुखी हैं.
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लेखक के बारे में
By विकाश नाथ
26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.
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