मछली पालन कर स्वावलंबी हो रहे ग्रामीण, पलायन पर लगा अंकुश

Updated at : 12 Apr 2017 7:54 AM (IST)
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मछली पालन कर स्वावलंबी हो रहे ग्रामीण, पलायन पर लगा अंकुश

गोपी कुंवर लोहरदगा : अविराम ग्रामीण विकास स्वयं सेवी संस्था मराडीह द्वारा ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने के लिए मत्स्य पालन के बारे में बताया जा रहा है. क्षेत्र के बेरोजगार, गरीब ग्रामीण काम की तलाश में दूर दराज के शहरों में पलायन कर जाते थे. पलायन से रोकने के लिए संस्थान द्वारा जीविका सृजन के […]

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गोपी कुंवर

लोहरदगा : अविराम ग्रामीण विकास स्वयं सेवी संस्था मराडीह द्वारा ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने के लिए मत्स्य पालन के बारे में बताया जा रहा है. क्षेत्र के बेरोजगार, गरीब ग्रामीण काम की तलाश में दूर दराज के शहरों में पलायन कर जाते थे.

पलायन से रोकने के लिए संस्थान द्वारा जीविका सृजन के तहत कार्यों की शृंखला में ही एक प्रमुख कार्य मत्स्य बीज का उत्पादन वितरण कर उन्हें रोजगार दिया जा रहा है. संस्थान द्वारा चुंद, जरियो, बसारडीह, सलगी, अंबाटोली,धौरा, सेमरडीह, कारीटोली गांव के कई ग्रामीणों को मछली जीरा प्रदान कर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाकर गांधी के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास स्वावलंबन के स्वप्न को चरितार्थ किया जा रहा है.

कुडू प्रखंड के चुंद, जरियो के जगदीश उरांव, राम भंडारी, सलगी के हजिया भगत, धौरा के मंगलेश्वर उरांव, अंबाटोली के सोमरा लकड़ा, सेमरडीह के मुन्ना भगत, बसारडीह के घनश्याम उरांव, कारी टोली के रवि उरांव साप्ताहिक बाजार में मछली बेच कर अच्छा जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

लाभुकों का कहना है कि मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में जिले में अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि मछली बेचने के लिए शहर जाना आवश्यक नहीं है, क्योंकि चांपी, कैरो, कुडू, टिको की साप्ताहिक बाजार में मछली की काफी मांग है. यदि ताजा मछली हो, तो खरीदार इसे समुचित मूल्य पर खरीदने से नहीं चूकते हैं.

इन लोगों का कहना है कि पहले रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था, जहां उनका हर तरह का शोषण होता था, लेकिन जब से अविराम के इंद्रजीत के संपर्क के आये तब से ईंट भट्ठा में जाना बंद हो गया और अब गांव में मछली पालन कर बेहतर जीवन यापन कर रहे हैं. अविराम संस्था के सचिव इंद्रजीत भारती ने बताया कि ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने के लिए मछली जीरा उत्पादन में वृद्धि कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभान्वित किया जायेगा. श्री भारती ने बताया कि सिर्फ लोहरदगा जिले को लिया जाये, तो यहां लोगों को अभी भी पर्याप्त मात्रा में ताजी मछली नहीं मिलती है. ताजी मछली के लिए लोग परेशान रहते हैं और जिन मछली पालकों के पास ताजी मछली उपलब्ध होती है, उनकी मछली हाथों हाथ बिक जाती है. मछली पालन को लेकर लोगों में काफी जागरूकता बढ़ी है.

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