मजदूर से मुखिया बनी कुड़ू की ललिता उरांव

अमित राज लोहरदगा : लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड के उडूमडू निवासी प्रभु उरांव की पुत्री ललिता उरांव कुड़ू के महिलाओं के लिए प्ररेणास्रोत बन गयी हैं. पति की मौत से टूट चुकीं ललिता ने अपने बूते जो मुकाम हासिल किया, वह किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है. वर्ष 2000 में ललिता […]
अमित राज
लोहरदगा : लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड के उडूमडू निवासी प्रभु उरांव की पुत्री ललिता उरांव कुड़ू के महिलाओं के लिए प्ररेणास्रोत बन गयी हैं. पति की मौत से टूट चुकीं ललिता ने अपने बूते जो मुकाम हासिल किया, वह किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है. वर्ष 2000 में ललिता की शादी लोहरदगा के रामपुर निवासी राजू उरांव के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज से हुई.
वर्ष 2005 में पति राजू उरांव की मौत हो गयी. ससुरालवालों ने उन्हें घर से निकाल दिया. ललिता पर दो बच्चियों की परवरिश का बड़ा बोझ आ गया. वर्ष 2005 में वह मायके आ गयीं. पंचायत भवन में मजदूरी की आैर एक दिन इसी भवन में बैठने का सपना देखने लगीं. वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव की घोषणा हुई, तो उन्होंने उडूमडू पंचायत से मुखिया पद के लिए परचा भर दिया. घर-घर जाकर अपने पक्ष में लोगों से मतदान करने की अपील की.
अकेली महिला के आत्मविश्वास ने सबको प्रभावित किया. लोगों ने ललिता के पक्ष में वोट किया और वह मुखिया चुन ली गयीं. इसके बाद ललिता उरांव जी-जान से लोगों की सेवा में जुट गयीं. अपनी जिम्मेवारियों का ईमानदारी से निर्वाह किया. इसी का नतीजा था कि वर्ष 2015 में क्षेत्र की जनता ने दोबारा उन्हें अपना मुखिया चुना. इस बार वह लगभग 1300 वोटों के बड़े अंतर से जीतीं.
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