पांच पशु चिकित्सालयों में तीन डॉक्टर विहीन, किस्को व पेशरार में 70 हजार पर मात्र दो चिकित्सक
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 25 Sep 2021 2:04 PM
किस्को व पेशरार प्रखंड में पशुपालन विभाग में अधिकारियों की कमी से पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है. दोनों प्रखंडों में मिला कर दो पशु चिकित्सक कार्यरत हैं.
किस्को व पेशरार प्रखंड में पशुपालन विभाग में अधिकारियों की कमी से पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है. दोनों प्रखंडों में मिला कर दो पशु चिकित्सक कार्यरत हैं. जबकि दोनों प्रखंड में लगभग 70 हजार पशु किसानों के पास हैं. बरसात में पशुओं में होनेवाली बीमारियों के इलाज को लेकर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
पदाधिकारियों की कमी से न समय पर से इलाज हो पाता है और न ही टीकाकरण का हो पाता है. शिविर लगा कर टीकाकरण नहीं होने से दोनों प्रखंडो में पशुओं में मौसमी बीमारी का प्रकोप अधिक होता है. प्रखंड में पांच पशु डॉक्टरों की पद स्वीकृत हैं, जिसमें मात्र दो डॉक्टर कार्यरत हैं. इसमें पेशरार में एक तथा किस्को में एक पदाधिकारी नियुक्त है.
प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ लक्ष्मण मुर्मू को पशुपालन पदाधिकारी के अलावा टीभीओ व जिले व प्रखंड में कई और पदों का प्रभार दिया गया है. टीभीओ प्रिया प्रज्ञा लकड़ा को पेशरार प्रखंड के अलावा किस्को प्रखंड के खरचा व पतरातू केंद्र में भी ड्यूटी करनी पड़ती हैं.
किस्को व पेशरार प्रखंड में संचालित पांच पशु चिकित्सालय में तीन चिकित्सालय डॉक्टर विहीन है. इन पशु चिकित्सालय में काफी दिन से पशु डॉक्टर नहीं हैं. ऐसी स्थिति में पशुओं का इलाज प्रभावित हो गया है. यहां पशुओं का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. कई बार लोगों के पशु जो बरसाती बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने पर उनकी मौत तक हो जाती है.
वज्रपात से होनेवाले मौत के बाद अधिकांश पशु मालिक पशुओं का पोस्टमार्टम नहीं करवा पाते हैं, जिससे उन्हें सरकार से मिलने वाली मुआवजा राशि भी नहीं मिल पाती है. केंद्र में सीमित दवा उपलब्ध करायी जाती है, जिस पर निर्भर रह कर पशु का इलाज किया जाता है. इससे पशुओं का बेहतर इलाज नहीं हो पाता है. कई जानवरों की जान चली जाती है.
इस मामले में प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ लक्ष्मण मुर्मू ने बताया कि डॉक्टरों की कमी व अतिरिक्त कार्य बोझ के कारण जानवरों को समुचित इलाज की व्यवस्था देने में परेशानी होती है. जो संसाधन उपलब्ध हैं, उसमें प्रयास रहता है कि पशुपालकों को परेशानी न हो दवा भी उपलब्ध है. चिकित्सक व चिकित्सा कर्मियों के कमी से परेशानी तो उठानी पड़ती है, फिर भी उपलब्ध संसाधनों के बीच हमलोग बेहतर इलाज करने का प्रयास करते हैं.
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