इको विकास समिति का हिसाब नहीं देने पर भड़के ग्रामीण, इडीसी काउंटर बंद रखने का प्रस्ताव

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इको विकास समिति का हिसाब नहीं देने पर भड़के ग्रामीण, इडीसी काउंटर बंद रखने का प्रस्ताव

इको विकास समिति का हिसाब नहीं देने पर भड़के ग्रामीण, इडीसी काउंटर बंद रखने का प्रस्ताव

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महुआडांड़़ प्रखंड के लोध गांव में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ग्रामसभा का आयोजन किया गया. ग्रामसभा की अध्यक्षता फ्रांसीस केरकेट्टा ने की. बैठक में इको विकास समिति (इडीसी) से आय–व्यय का हिसाब मांगा गया. इस पर इडीसी अध्यक्ष ने बताया कि बैठक में इडीसी सचिव उपस्थित नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें जीव-जंतु जनगणना कार्य में जाना पड़ा है. वहीं, वन विभाग के कर्मी भी अनुपस्थित रहे, जिस कारण समिति का हिसाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका. ग्रामसभा में ग्रामीणों ने इडीसी द्वारा लगातार हिसाब नहीं देने पर नाराजगी जतायी. ग्रामीणों ने प्रस्ताव पारित किया कि जब तक इडीसी द्वारा आय–व्यय का पूरा विवरण प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक इडीसी काउंटर को बंद रखा जायेगा. इस संबंध में जिप सदस्य ने बताया कि ग्रामसभा में इडीसी के हिसाब को लेकर पिछले 15 दिनों से गतिरोध बना हुआ है. इसकी जानकारी संबंधित विभागों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक वन विभाग के वरीय अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया है. पूर्व अध्यक्ष से आय-व्यय का ब्योरा मांगा गया : इधर, वन विभाग ने इको विकास समिति लोध के पूर्व अध्यक्ष सुनील नगेशिया से उनके कार्यकाल के दौरान समिति के आय–व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इस संबंध में विभाग ने आधिकारिक पत्र जारी किया है. पत्र के अनुसार पूर्व अध्यक्ष को अपने कार्यकाल 15 नवंबर 2020 से फरवरी 2024 तक का संपूर्ण आय-व्यय विवरण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है. पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस विषय में पूर्व में कई बार सूचना देने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला. वन परिक्षेत्र पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि सात दिनों के भीतर संबंधित अवधि का आय-व्यय विवरण कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जायेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी. वन विभाग मुझे बलि का बकरा बना रहा है : पूर्व अध्यक्ष सुनील नगेशिया ने कहा कि इडीसी में गबन का मामला उन्होंने ही उठाया था, इसलिए वन विभाग उन्हें बलि का बकरा बना रहा है. उन्होंने दावा किया कि पूर्व का हिसाब-किताब तत्कालीन कोषाध्यक्ष से लिया जा सकता है.

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Shailesh Ambashtha

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