ओके:::पलामू टाइगर रिजर्व में टूरिस्ट की तरह आ रहे हैं बाघ: सरयू राय

Published by : VIKASH NATH Updated At : 07 Jun 2025 10:22 PM

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झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के सभापति सरयू राय ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व को स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडी) बनाने की जरूरत है, ताकि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के प्रोविजन के अनुसार काम किया जा सके.

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तसवीर-7 लेट-4 जानकारी देते श्री रायसंतोष कुमार.

बेतला. झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के सभापति सरयू राय ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व को स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडी) बनाने की जरूरत है, ताकि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के प्रोविजन के अनुसार काम किया जा सके. वर्तमान में स्वायत्त निकाय नहीं होने के कारण छोटी-छोटी योजनाओं को लागू करने के लिए निर्णय सरकार के हाथ में होता है. श्री राय बेतला दौरे के क्रम में पत्रकारों से उक्त बातें कही. उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि 1973 में देश में नौ टाइगर रिजर्व की स्थापना की गयी थी. इनमें पलामू टाइगर रिजर्व बेहतर स्थिति में था, लेकिन आज वह बदतर स्थिति में है. पीटीआर की ऐसी स्थिति क्यों बनी इस कारण की पड़ताल की जानी चाहिये और जिसकी ओर से भी कमी रहा है उसे दूर किया जाना चाहिये. उन्होंने कहा कि यह बताया गया कि छह बाघ हैं. हैरानी की बात है कि पलामू टाइगर रिजर्व में टूरिस्ट की तरह बाघ आ रहे हैं और चले जा रहे हैं, इसलिए इस तरह का काम करना होगा, जिससे बाघों का प्रवास स्थायी रूप से हो सके. उन्होंने कहा कि कोर एरिया से गांव को पुनर्वासित करने का काम किया जा रहा है. यह जंगल और जानवर के लिए बेहतर है. लेकिन जो गांव पलामू टाइगर रिजर्व के बाहर हैं, उन्हें घेराबंदी कर देने से कोई हल नहीं निकलनेवाला नहीं है, बल्कि उन गांवों के ग्रामीणों से भी जंगल बचाने में सहयोग लेने की जरूरत है. उन्हें रोजगार सृजन का अवसर दिया जाना चाहिये. उनके सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक क्रियाओं में वन विभाग के पदाधिकारी को मिलकर काम करना चाहिये. जेसीबी मशीन से काम करने के बजाय ग्रामीणों से काम कराया जाना चाहिये, ताकि उन्हें आर्थिक लाभ मिल सके. सभापति ने कहा कि समिति पलामू टाइगर रिजर्व के दौरे पर इसलिए हैं, ताकि वह यहां समस्याओं को करीब से देख सके. यहां की जमीनी हकीकत को समझ कर समस्याओं से रूबरू हो सके. पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि पीटीआर के संरक्षण और संवर्धन में जो भी कठिनाइयां हैं, उनका प्रतिवेदन तैयार कर उन्हें दें, ताकि राज्य स्तरीय बैठक में उसे सरकार और पदाधिकारी के बीच रखा जा सके. वह स्वयं 2016 से पीटीआर में लगातार आते रहे हैं और सुझाव देते रहे हैं. मौके पर समिति के सदस्य दुमका जिले के जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के विधायक देवेंद्र कुंवर समेत कई लोग मौजूद थे.

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