सरहुल मानव व प्रकृति के अटूट संबंध का प्रतीक

Updated at : 21 Mar 2026 9:32 PM (IST)
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सरहुल मानव व प्रकृति के अटूट संबंध का प्रतीक

सरहुल मानव व प्रकृति के अटूट संबंध का प्रतीक

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चंदवा़ कुसुमटोली स्थित कृषि फार्म परिसर में शनिवार को सरहुल पर्व महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ झकरा सरना स्थल पर पाहन कर्मा मुंडा और पड़हा राजा धनेश्वर उरांव की अगुवाई में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुआ. मुख्य अतिथि कार्यपालक अभियंता प्रदीप भगत ने कहा कि सरहुल मानव और प्रकृति के अटूट संबंध का प्रतीक है. उन्होंने आने वाली पीढ़ी के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने का आह्वान किया. विशिष्ट अतिथि सीओ सुमित झा, बीडीओ चंदन प्रसाद और इंस्पेक्टर रणधीर कुमार ने भी प्रकृति संरक्षण पर जोर दिया. नवाहिर उरांव, सितमोहन मुंडा, आयोजन समिति के अध्यक्ष विमल उरांव व अन्य अतिथियों ने भी सरहुल पर्व को लेकर अपनी बात रखी. संचालन बिमल उरांव, धनलाल उरांव, राकेश लोहरा, विनोद भगत ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में मंजय उरांव, बबन मुंडा, रूपेश उरांव, बीरबल उरांव आदि जुटे थे. पूजा के बाद कृषि फार्म में सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की गयी, इसमें पूरे प्रखंड से हजारों की संख्या में महिला-पुरुष और बच्चे शामिल हुए. भव्य शोभायात्रा और सामाजिक सद्भाव : महोत्सव के दौरान एक भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जो इंदिरा चौक, मेन रोड और बुध बाजार होते हुए पुनः सभा स्थल पहुंची. इस दौरान अन्नपूर्णा बीज भंडार, झारखंड पठारी ट्रक ओनर एसोसिएशन और शौनडिक-जायसवाल समाज, कैथोलिक सभा, चालक संघ सहित कई संगठनों ने जगह-जगह स्टॉल लगाकर श्रद्धालुओं के बीच शीतल पेय, शरबत और चना-गुड़ का वितरण किया. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपी कुमार गौरव के निर्देशन में चंदवा पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण संपन्न हुआ.

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SHAILESH AMBASHTHA

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