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प्रेम का अर्थ त्याग और समर्पण होता है : विनी किशोरी

Updated at : 09 Oct 2024 8:40 PM (IST)
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प्रेम का अर्थ त्याग और समर्पण होता है : विनी किशोरी

सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में राजस्थान से आयी प्रवचनकर्ता विनी किशोरी ने प्रवचन दिया़

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बालूमाथ. सनातन धर्म में तलाक शब्द का हिंदी अर्थ नहीं है, क्योंकि हमारे यहां एक बार जो शादी के बंधन में बन जाता है, वह सात जन्मों तक साथ निभाता है. आजकल लोग प्रेम नहीं करते हैं, प्रेम का सौदा करते हैं. प्रेम का मतलब उपहार लेना-देना नहीं होता. तुम प्रेम करोगे, तब हम करेंगे, ऐसा नहीं होता है. प्रेम का अर्थ त्याग व समर्पण होता है. कभी भी अपने पति को अपना जूठा नहीं देना चाहिए. आजकल लोगों ने भ्रांति बना दिया है, जूठा खाने से प्रेम बढ़ता है. अगर ऐसा होता तो स्वान (कुत्ता) क्यों आपस में लड़ते, जबकि वह तो जूठा छीन-छीन कर खाते हैं. महिलाओं को बिना स्नान किये रसोई में नहीं जाना चाहिए. उक्त बातें सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में राजस्थान से आयी प्रवचनकर्ता विनी किशोरी ने कही. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण पृथ्वी के देवता है. गोपी गीत भागवत कथा की सबसे श्रेष्ठ गीत है. गोपियों का भाव देखकर भगवान कृष्ण भी प्रकट हो गये थे. अनुष्ठान को सफल बनाने में पूजा समिति के अध्यक्ष रवि सिंह, शैलेश सिंह, रामजी सिंह, अखिलेश भोक्ता, लालदेव गंझु, रामनाथ सिंह, बबलू चौरसिया, ऋषि कुमार, अमित कुमार रवि रजक, संजय कुशवाहा, संदीप कुमार आदि सहयोग कर रहे हैं.

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