लातेहार झारखंड का पहला जिला है जहां एसएलआरएम कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है: मंत्री

Updated at : 19 Feb 2025 6:02 PM (IST)
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लातेहार झारखंड का पहला जिला है जहां एसएलआरएम कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है: मंत्री

जिला मुख्यालय के स्टेशन रोड में अवस्थित टाउन हॉल में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सॉलिड एवं लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएलआरएम) के तहत 10 दिवसीय आवासीय जलसहिया मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया.

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स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सॉलिड एवं लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट एसएलआरएम के तहत जलसहिया मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम तसवीर-19 लेट-6 उद्घाटन करते अतिथि लातेहार. जिला मुख्यालय के स्टेशन रोड में अवस्थित टाउन हॉल में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सॉलिड एवं लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएलआरएम) के तहत 10 दिवसीय आवासीय जलसहिया मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने किया. अपने संबोधन में मंत्री श्री प्रसाद ने कहा कि लातेहार झारखंड का पहला जिला होगा जहां सॉलिड एवं लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएलआरएम) कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी. मंत्री श्री प्रसाद ने कहा कि 45-50 दिनों के भीतर लातेहार दोबारा आयेंगे और इस कार्यक्रम की प्रगति को देखेंगे. प्रशिक्षण कार्यक्रम में पर्यावरण विशेषज्ञ सी श्रीनिवासन ने अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि उद्यान अपशिष्ट, मछली बाजार अपशिष्ट, सब्जी अपशिष्ट आदि का प्राथमिक पृथक्करण स्रोत पर और द्वितीयक पृथक्करण एसएलआरएम केंद्रों पर किया जाता है. जबकि तृतीयक पृथक्करण एक सामान्य केंद्र पर होता है. पेयजल विभाग के प्रधान सचिव मस्त राम मीणा ने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण हेतु ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन की तकनीकों को अपनाना अनिवार्य है. उन्होंने हरित एवं स्वच्छ झारखंड के लक्ष्य को साकार करने के लिए कचरा प्रबंधन की आधुनिक प्रक्रिया अपनाने पर बल दिया. स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक डा नेहा अरोड़ा ने कहा कि लातेहार जिला पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है. उन्होंने कहा कि लातेहार एक विकसित पर्यटन स्थल के रूप में पहचाना जाता है और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन आज की आवश्यकता बन गई है. इससे लातेहार जिला स्वच्छ और सुंदर बनेगा. डा अरोड़ा ने विश्वास जताया कि अगले एक वर्ष में लातेहार स्वच्छता के सभी मानदंडों को पूरा कर 5-स्टार जिला के रूप में विकसित होगा. उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने जिले को शून्य-अपशिष्ट बनाने के लक्ष्य पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत जिले को एक स्वच्छ, हरा-भरा और कचरा मुक्त क्षेत्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है. जलसहिया व समूह की महिलाओं को मिल रहा प्रशिक्षण: 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी पंचायतों से 230 जलसहिया एवं नगर पंचायत की 60 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है. प्रशिक्षण लेने क बाद प्रशिक्षु मास्टर ट्रेनर के रूप में अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित करेंगे जिससे यह कार्यक्रम जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू हो सके. मौके पर पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव, पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना, उप विकास आयुक्त सुरजीत कुमार सिंह, परियोजना निदेशक आईटीडीए प्रवीण कुमार गगरई, अपर समाहर्ता रामा रविदास, जिला परिवहन पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अजय कुमार रजक, जिला आपूर्ति पदाधिकारी रश्मि लकड़ा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अलका हेम्ब्रम, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता दीपक कुमार महतो समेत कई अधिकारी उपस्थित थें.

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