बनहरदी कोयला खनन परियोजना क्षेत्र में भारी हंगामा, रैयतों ने काम रोका
Published by : SHAILESH AMBASHTHA Updated At : 30 Jan 2026 11:13 PM
बनहरदी कोयला खनन परियोजना क्षेत्र में भारी हंगामा, रैयतों ने काम रोका
चंदवा़ पीवीयूएनएल की बनहरदी कोयला खनन परियोजना क्षेत्र में शुक्रवार को कंपनी प्रबंधन और स्थानीय रैयतों के बीच जबरदस्त टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गयी. कंपनी द्वारा बिना पूर्व सूचना और बिना ग्राम सभा की सहमति के परियोजना क्षेत्र में मशीनें उतारने के प्रयास से ग्रामीण उग्र हो गये. इस दौरान कंपनी कर्मियों और रैयतों के बीच तीखी नोकझोंक और तूतू-मैंमैं हुई. मामला बिगड़ता देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. क्या है पूरा मामला : शुक्रवार को कंपनी के कर्मी जेसीबी और हाइड्रा मशीन लेकर परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे थे. वहां लोहे के बड़े कंटेनर (केबिन) उतारकर साइट ऑफिस या कैंप स्थापित करने की कोशिश की जा रही थी. जैसे ही इसकी भनक स्थानीय रैयतों को मिली, सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष और युवा मौके पर जमा हो गये. ग्रामीणों ने कंपनी की मशीनों को घेर लिया और कार्य करने से रोक दिया. ग्रामीणों का आक्रोश देख कंपनी कर्मियों को काम रोकना पड़ा. सूचना मिलते ही पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी रणधीर कुमार सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया. विस्थापन नीति और कागजी गड़बड़ी पर नाराजगी : रैयतों ने अधिकारियों से सीधे सवाल-तलब करते हुए कहा कि कंपनी प्रबंधन तानाशाही रवैया अपना रही है. ग्रामीणों के अनुसार, अब तक न तो विस्थापन नीति स्पष्ट की गयी है और न ही रैयतों की समस्याओं का समाधान हुआ है. हालिया सर्वे के कारण भूमि के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां हैं. कंपनी प्रबंधन ऑफलाइन कागजातों को स्वीकार नहीं कर रहा है और ऑनलाइन रिकॉर्ड दुरुस्त होने में तकनीकी बाधाएं आ रही हैं. ग्रामीणों ने मांग की कि पहले भू-अभिलेखों में सुधार किया जाये और विधिवत ग्राम सभा आयोजित कर सहमति ली जाये. जबरन प्रवेश हुआ तो होगा उलगुलान : रैयतों ने दो टूक कहा कि यदि भविष्य में उनकी सहमति के बिना जबरन प्रवेश का प्रयास किया गया, तो क्षेत्र में उलगुलान (बड़ा जन-आंदोलन) किया जायेगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. इधर, कंपनी प्रबंधन ने भी बैकफुट पर आते हुए आश्वासन दिया कि आगे की कोई भी गतिविधि रैयतों के साथ समन्वय बनाकर ही की जायेगी. अंत में ग्रामीणों ने थाना प्रभारी को आवेदन सौंपकर बिना प्रशासनिक और रैयती सहमति के कंपनी के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की.
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