प्रखंड कार्यालय से मनरेगा का भुगतान, लाभुक परेशान

Updated at : 12 May 2017 8:05 AM (IST)
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प्रखंड कार्यालय से मनरेगा का भुगतान, लाभुक परेशान

चंदवा : प्रखंड में मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर पदाधिकारी भी कई तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं. चंदवा प्रखंड में मनरेगा योजना में लूट जारी है. लाभुकों को सामग्री मद में अभिश्रव के बराबर पैसा भी नहीं मिल रहा. पंचायतों को सशक्त बनाने को लेकर केंद्र से राज्य सरकार तक लगी है. फिलवक्त […]

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चंदवा : प्रखंड में मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर पदाधिकारी भी कई तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं. चंदवा प्रखंड में मनरेगा योजना में लूट जारी है. लाभुकों को सामग्री मद में अभिश्रव के बराबर पैसा भी नहीं मिल रहा. पंचायतों को सशक्त बनाने को लेकर केंद्र से राज्य सरकार तक लगी है. फिलवक्त प्रखंड के सभी 17 पंचायत सचिवालय में प्रज्ञा केंद्र संचालित हैं. करीब एक वर्ष पूर्व सभी प्रज्ञा केंद्रों से ही मनरेगा में भुगतान किया जाता था.
डिमांड के बाद केंद्र संचालय मस्टर रोल निकालते थे. मस्टर रोल भरने के बाद प्रज्ञा केंद्र से ही फंड ट्रांसफर (एफटीओ) किया जाता था. फिलवक्त पूरे प्रखंड में मनरेगा योजना में एफटीओ की प्रक्रिया प्रखंड कार्यालय स्थित कंप्यूटर कक्ष से ही होता है. दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते है. ऑपरेटर को चढ़ावा देने के बाद काम संभव होता है. ऐसे में ग्रामीण भी परेशान हो रहे हैं.
इस संबंध में प्रज्ञा केंद्र के संचालकों ने बताया कि एक वर्ष पूर्व केंद्र से ही सारा काम होता था. उप विकास आयुक्त कार्यालय से इसके लिये पत्र भी प्रेषित किया गया था. ऐसे में ग्रामीणों का काम जल्दी हो जाता था. पूर्व बीडीओ देवानंद राम ने इस प्रक्रिया को बंद करा दिया. इसके बाद से प्रखंड कार्यालय से ही भुगतान की प्रक्रिया की जाने लगी. लाभुक को पूरी जानकरी भी नहीं दी जाती. ऐसे में गड़बड़ी की आशंका काफी बढ़ जाती है. ग्रामीणों ने प्रज्ञा केंद्र से ही भुगतान करने की मांग जिला प्रशासन से की है.
कर्मियों की उदासीनता के कारण भुगतान लंबित
हेरहंज. प्रखंड प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण प्रखंड में इंदिरा आवास के कई लाभुकों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है. प्रखंड के घूर्रे गांव निवासी दिव्यांग जीतेंद्र लोहरा पिछले आठ माह से आवास का पैसा लेने के लिए प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. दिव्यांग जीतेंद्र ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में 75 हजार रुपये की लागत से आवास योजना की स्वीकृति मिली थी. प्रथम किस्त के रूप में 18750 रुपये मिले. इसके बाद कर्ज लेकर घर पूरा किया.
अब तक शेष राशि का भुगतान नहीं मिला है. कर्मियों द्वारा कभी फोटो तो कभी दूसरे बहाने से टाल दिया जाता है. लाभुक के चाचा उपेंद्र लोहरा ने बताया कि पहले किस्त की राशि मिलने के बाद डोर लेवल तक कार्य किया गया. दूसरी किस्त की मांग पर आवास पूर्ण करने के बाद भुगतान की बात कही गयी. बीडीओ श्रवण राम ने कहा कि दस दिन पूर्व ही पैसे उसके खाते में भेजा जा चुका है. थोड़ा समय लगेगा.
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