कटिया से भी खतरनाक है कुमंडीह की राजगढ़ पहाड़ी

Published at :16 Jul 2013 1:55 PM (IST)
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कटिया से भी खतरनाक है कुमंडीह की राजगढ़ पहाड़ी

लातेहार : बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के कटिया पहाड़ी, जो गत आपरेशन के दौरान 11 जवानों की शहादत का गवाह है, कटिया के दुर्गम रास्ते से ही कुमांडीह का राजगढ़ पहाड़ी शुरू होता है और तीखी घाटियों से हो कर चोटी तक पहुंचता है, जहां नक्सली पिछले 10 दिनों से मोरचाबंदी किये हुए हैं. राजगढ़ के […]

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लातेहार : बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के कटिया पहाड़ी, जो गत आपरेशन के दौरान 11 जवानों की शहादत का गवाह है, कटिया के दुर्गम रास्ते से ही कुमांडीह का राजगढ़ पहाड़ी शुरू होता है और तीखी घाटियों से हो कर चोटी तक पहुंचता है, जहां नक्सली पिछले 10 दिनों से मोरचाबंदी किये हुए हैं.

राजगढ़ के बारे में कहा जाता है कि पलामू के चेरो राजवंश के राजा मेदिनीराय ने पलामू किले से लातेहार के नावागढ़ तक सुरंग बनाया था, ताकि आपात काल में राजा इस गुप्त मार्ग के जरिये अपने किले से काफी दूर सुरक्षित निकल सकें.

इसी सुरंग के रास्ते राजगढ़ एवं मुरमू पहाड़ी है, जिस पर बंकरनुमा दीवारें हैं जो सुरंगी मार्ग के बीच एवं अंत में खुले हुए है और काफी ऊंचाई पर स्थित बंकर पर खुलता है, ताकि दुश्मन सीधा आक्रमण नहीं कर सकें और सकुशल सुरंग के रास्ते से किला तक पहुंच सकें. वर्षो बाद अब इस पहाड़ी बंकर का सुरक्षित इस्तेमाल यहां सक्रिय नक्सली कर रहे हैं.

मालूम हो कि पिछले दिनों से यहां नक्सली अपना कैंप बना कर गुरिल्ला प्रशिक्षण देते आ रहे हैं. पुलिस के आला अधिकारियों ने इस राजगड़ में ठहरे हुए माओवादियो को घेरने के लिए आपरेशन जाल-चार चलाया है. आपरेशन के आठवें दिन मंगलवार से पुलिस ने इन माओवादियों तक पहुंचने वाला रसद पानी पर पैनी नजर टिकाये हुए हैं.

पुलिस अधीक्षक लातेहार डॉ माइकल राज एस एवं सीआरपीएफ के एक आला अधिकारी ने दावा किया है कि माओवादी अभी भी राजगढ़ पहाड़ी पर हैं और यह आपरेशन जारी रहेगा. पुलिस की जो अगली रणनीति है, उसमें सभी रास्तों को सील करके पहाड़ी को घेरना तथा उनके रसद पानी की आपूर्ति को रोकना.

यद्यपि नक्सली भी इसी पहाड़ी पर जमे रहने का दावा तो करते आ रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि माओवादियो का दस्ता वहां से कूच कर गया है और पुलिस उनके युद्ध विराम की आशा देख रही है.

आपरेशन से ग्रामीणों को भारी परेशानी : माओवादियों एवं पुलिस के लगातार मुठभेड़ एवं जगह जगह बम फटने की आवाज से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है.

सबसे अधिक परेशानी मवेशियों को उठानी पड़रही है. कुमांडीह के बड़काडीह एवं अमवाटीकर में तो कई दिनों से मवेशियां खूंटे में बांधी हुई है. क्योंकि जंगल में गोलीबारी काफी हो रही है और मवेशियों के चरवाहे मारे भय से वहां नहीं जा रहे हैं.

अभियान जारी रहेगा : लातेहार के एसपी डॉ राज का कहना है कि माओवादियों के खिलाफ चलाया जा रहा यह अभियान अभी जारी रहेगा. श्री राज का आगे कहना है कि माओवादियों को मुख्यधारा में आने की जरूरत है.

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