नाबालिग के साथ गैंगरेप के आरोपियों को आजीवन कारावास

Updated at : 17 Mar 2019 1:21 AM (IST)
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नाबालिग के साथ गैंगरेप के आरोपियों को आजीवन कारावास

सरस्वती पूजा जुलूस के दौरान अगवा कर किया गया था गैंगरैप तीन आरोपियों में एक साबित हुआ नाबालिग, दूसरा फैसले के दिन भागा राषिकेश कुमार की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला लातेहार : पोक्सो एक्ट के तहत गठित विशेष अदालत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राषिकेश कुमार की अदालत ने गैंग रैप मामले के […]

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सरस्वती पूजा जुलूस के दौरान अगवा कर किया गया था गैंगरैप

तीन आरोपियों में एक साबित हुआ नाबालिग, दूसरा फैसले के दिन भागा

राषिकेश कुमार की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला

लातेहार : पोक्सो एक्ट के तहत गठित विशेष अदालत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राषिकेश कुमार की अदालत ने गैंग रैप मामले के एक आरोपी की सुनवाई पूरी होने पर आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी है. मामले के अनुसार विगत 14 फरवरी 2016 को बालुमाथ में सरस्वती पूजा के विसर्जन जुलूस के दौरान एक स्कूली छात्रा के साथ बलात्कार के अारोप में बालुमाथ निवासी मो सद्दाम, मो इकबाल एवं मो शहाबुद्दीन के विरुद्ध बालुमाथ थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. उक्त प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत उक्त तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था.

मामले का विचारण पोक्सो एक्ट 2012 के तहत गठित श्री कुमार की विशेष अदालत में हुआ. इसमें एक आरोपी मो इकबाल को किशोर घोषित किया गया और मामले को किशोर न्याय बोर्ड में विचारण के लिए भेजा गया, जबकि मो सद्दाम एवं मो सहाबुद्दीन का विचारण विशेष अदालत में किया गया.

उक्त मामले में अभियोजन पदाधिकारी बलराम साह ने कुल 11 गवाहों को पेश किया था. इसमें पीड़िता का दप्रसं की धारा 164 के तहत बयान कलमबद्ध करने वाले जज संदीप निशित बाड़ा की गवाही उक्त अदालत में करायी गयी थी.

गवाहों की गवाही के उपरांत विचारण अदालत ने दो आरोपियों मो सद्दाम एवं मो सहाबुद्दीन को नाबालिग के साथ जबरन मुंह काला करने का आरोप सत्य पाया गया. अदालत ने 13 मार्च को फैसले की तिथि निर्धारित की थी.

उक्त तिथि को मो सहाबुद्दीन अदालत में उपस्थित नहीं हुआ तब फैसले की तिथि 15 मार्च निर्धारित की गयी और मो सद्दाम को दोषी पाया गया. 16 मार्च को श्री कुमार की विशेष अदालत ने आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास एवं 25 हजार जुर्माना की सजा सुनायी. जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा मुकरर किया है.

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