निजी अस्पतालों के भी ओपीडी रहे बंद

Updated at : 01 Oct 2016 7:50 AM (IST)
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निजी अस्पतालों के भी ओपीडी रहे बंद

सरकारी अस्पतालों के साथ शुक्रवार को निजी अस्पतालों में भी बंद रहा ओपीडी, डाॅक्टरों ने जगह-जगह जताया रोष. कोडरमा बाजार/झुमरीतिलैया : मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग व सरकार के तुगलकी फरमान के विरोध में डाॅक्टरों का कार्य बहिष्कार तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा. तय कार्यक्रम के तहत कार्य बहिष्कार के तीसरे […]

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सरकारी अस्पतालों के साथ शुक्रवार को निजी अस्पतालों में भी बंद रहा ओपीडी, डाॅक्टरों ने जगह-जगह जताया रोष.
कोडरमा बाजार/झुमरीतिलैया : मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग व सरकार के तुगलकी फरमान के विरोध में डाॅक्टरों का कार्य बहिष्कार तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा. तय कार्यक्रम के तहत कार्य बहिष्कार के तीसरे दिन सरकारी डाॅक्टरों का निजी डाक्टरों ने भी साथ दिया.
अपनी मांगों को लेकर उन्होंने जगह-जगह रोष जताया. डाॅक्टरों के कार्य बहिष्कार से सदर अस्पताल समेत विभिन्न सरकारी अस्पतालों में जहां तीसरे दिन ओपीडी ठप रहा, वहीं शुक्रवार को निजी अस्पतालों में भी ओपीडी में मरीजों को देखने का काम बंद रहा. इससे मरीज परेशान दिखे. डाॅक्टरों का तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार समाप्त होने से शनिवार को परेशान मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है.
निजी डाॅक्टरों ने आइएमए के बैनर तले झंडा चौक पर जमा होकर रोष जताया, तो सरकारी डाॅक्टरों ने झासा के बैनर तले सदर अस्पताल परिसर में जमा होकर रोष जाहिर किया. अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद रहने से पूरे जिले में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गयी. डाॅक्टरों की सेवा नहीं देने से मरीजों के साथ ही उनके परिजन भी परेशान दिखे. परेशान बेहाल मरीज इधर-उधर भटकते रहे, पर कहीं भी ओपीडी में इलाज संभव नहीं हुआ.
हालांकि इमरजेंसी में मरीज को देखने का दावा डाॅक्टरों के संघ ने किया है. राज्य झासा के संयुक्त सचिव डाॅ रमण कुमार व उपाध्यक्ष डाॅ शरद कुमार ने बताया कि सरकार के गलत आदेश का विरोध करने के साथ ही हम मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं, पर सरकार इस ओर ध्यान नहीं देकर डाॅक्टरों को परेशान करने में लगी है. उन्होंने बताया कि सरकारी डाॅक्टरों ने शुरुआती दो दिनों तक कार्य बहिष्कार किया, तो तीसरे दिन निजी डाॅक्टरों ने भी आंदोलन का साथ दिया.
अगर इसके बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं देती है, तो सभी सरकारी डाॅक्टर सामूहिक इस्तीफा देने को तैयार हैं. सिविल सर्जन समेत 30 चिकित्सा पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे पर हस्ताक्षर कर दिया है. 14 अक्तूबर तक मांगों पर ठोस विचार नहीं हुआ, तो 15 अक्तूबर को झासा द्वारा सामूहिक इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंपा जायेगा. सदर अस्पताल परिसर में कार्य बहिष्कार के दौरान झासा के जिलध्यक्ष डा एसके झा, राज्य उपाध्यक्ष डाॅ शरद कुमार, संयुक्त सचिव डाॅ रमण कुमार, जिला सचिव डाॅ एबी प्रसाद, वरीय चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ आरजेपी सिंह, डाॅ रंजन कुमार, डाॅ श्रद्धा, डाॅ संध्या टोप्पनो, डाॅ आशीष कुमार, डाॅ मनोज कुमार, डाॅ अमरेंद्र कुमार सिन्हा, डाॅ भारती सिन्हा आदि मौजूद थे.
वहीं आइएमए के बैनर तले झंडा चौक पर विरोध जतानेवालों में आइएमए के सचिव डाॅ रमण कुमार, डाॅ एसके झा, डाॅ उपेंद्र भदानी, डाॅ मनोज भदानी, डाॅ एबी प्रसाद, डाॅ नरेश पंडित, डाॅ वीरेंद्र कुमार, डाॅ आशीष, डाॅ अजय कुमार, डाॅ अभिजीत कुमार, डाॅ रंजीत कुमार, डाॅ अरविंद कुमार, डाॅ रंजीत कुमार वर्णवाल, डाॅ राजीव पांडेय, डाॅ विकास चंद्रा, डाॅ मनोज, डाॅ राजन कुमार, डाॅ राजेश कुमार, डाॅ अभिलाषा गुप्ता, डाॅ भावना, डाॅ श्रद्धा, डाॅ लुना मित्रा, डाॅ रचना गुप्ता, डाॅ प्रवीण कुमार, डाॅ संदेश कुमार गुप्ता, डाॅ रंजन कुमार मौजूद थे.
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