बिरहोरों की ट्रेनिंग में गड़बड़ी, एनजीओ ब्लैक लिस्टेड

Updated at : 15 Mar 2016 7:30 AM (IST)
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बिरहोरों की ट्रेनिंग में गड़बड़ी, एनजीओ ब्लैक लिस्टेड

कोडरमा : आदिम जनजाति बिरहोर के परिवारों के उत्थान के लिए प्रशिक्षण के नाम पर पिछले वर्ष हुई गड़बड़ी मामले में एनजीओ प्रगति एजुकेशनल एकेडमी झिंझरी (मांडर, रांची) को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है. यह जानकारी डीसी संजीव कुमार बेसरा ने दी है. इस संबंध में पूछे जाने पर डीसी श्री बेसरा ने बताया […]

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कोडरमा : आदिम जनजाति बिरहोर के परिवारों के उत्थान के लिए प्रशिक्षण के नाम पर पिछले वर्ष हुई गड़बड़ी मामले में एनजीओ प्रगति एजुकेशनल एकेडमी झिंझरी (मांडर, रांची) को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है. यह जानकारी डीसी संजीव कुमार बेसरा ने दी है. इस संबंध में पूछे जाने पर डीसी श्री बेसरा ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामले में एनजीओ की गलती पायी गयी है. विभागीय पदाधिकारी या कर्मी की मिलीभगत जैसी बात सामने नहीं आयी है और न ही इसको लेकर साक्ष्य है. इसलिए एनजीओ के विरुद्ध कार्रवाई हुई है.

तत्कालीन डीसी ने दिया था जांच का आदेश : बिरहोरों को मुर्गी पालन, सूकर पालन व बकरी पालन का प्रशिक्षण (23 जनवरी से 28 मार्च 2015 तक) दिये जाने का दावा एनजीओ प्रगति एजुकेशनल एकेडमी द्वारा किया गया था. इसके बदले में एनजीओ ने कल्याण विभाग को प्रशिक्षण के दौरान हुए विभिन्न खर्चों को दिखाते हुए करीब आठ लाख रुपये का विपत्र भुगतान के लिए पेश किये थे.

पीएलवी तुलसी कुमार को आरटीआइ से मिली जानकारी के बाद प्रभात खबर में प्रशिक्षण के नाम पर हुई गड़बड़ी की रिपोर्ट सितंबर 2015 में छपी थी. मामला सामने आने के बाद तत्कालीन उपायुक्त छवि रंजन ने जांच के आदेश देते हुए एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार के नेतृत्व में जांच टीम गठित की थी. कमेटी ने 26 फरवरी 2016 को जो जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपी, उसमें एनजीओ के खिलाफ अनियमितता की बात तो कही गयी थी, लेकिन बचाव के प्रयास भी किये गये थे.

यह मामला योजना समिति की बैठक में भी उठा. इसके बाद एनजीओ व विभागीय पदाधिकारियों के बचाव के प्रयास से संबंधित शिकायत सीएम के जनसंवाद में पहुंचा.

20 दिन का प्रशिक्षण एक ही साथ दिया गया था : ज्ञात हो कि एसडीओ व कार्यपालक दंडाधिकारी रेणु बाला की जांच कमेटी ने स्पष्ट किया था कि 20 दिन का प्रशिक्षण एक ही साथ दिया गया.

एनजीओ ने जो विपत्र प्रस्तुत किया है, वह अनुमोदित बजट प्रस्ताव के अंतर्गत ही है, किंतु स्थानीय जांच में कुछ भिन्नता पायी गयी. जैसे, रिसोर्स पर्सन का मानदेय, भोजन, नास्ता पानी का जिक्र, एलसीडी, लैपटॉप आदि का विपत्र व प्रशिक्षण सामग्री आदि का विपत्र कुछ अधिक दिया गया है. पर सच्चाई यह थी कि प्रशिक्षण में एलसीडी व प्रोजेक्टर का प्रयोग नहीं हुआ था. नास्ता व बोतल का पानी नहीं पिलाया गया था. विपत्र में खाना व नास्ता का होटल से देने का जिक्र है, जबकि आंगनबाड़ी में ही कूक द्वारा भोजन बना कर खिलाया गया था.

कल्याण विभाग की लापरवाही मानी, पर कार्रवाई नहीं : जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कल्याण विभाग की कार्यशैली सवालों में घिर गयी है. रिपोर्ट में एसडीओ ने लिखा है कि जिला कल्याण पदाधिकारी ने अपने पत्रांक 532 दिनांक 19-9-2015 के द्वारा एनजीओ को भुगतान पर रोक लगाने की जानकारी दी है.

प्रगति एजुकेशनल एकेडमी द्वारा समर्पित विपत्र संस्था के सचिव द्वारा पारित किया गया है. विपत्र की जांच कल्याण विभाग के किसी भी कर्मी या पदाधिकारी द्वारा नहीं की गयी है. विभाग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम की निगरानी व अनुश्रवण नहीं किये जाने के कारण इस तरह की विसंगति देखने को मिल रही है.

विभाग के कर्मी, पदाधिकारी द्वारा उनके विपत्रों की जांच कर जिन मदों से अधिक राशि का विपत्र जमा किया गया है, कटौती कर नियमानुसार संबंधित विभाग को भुगतान के लिए भेजा जा सकता है. रिपोर्ट के अंत में लिखा है एनजीओ पर लगाया गया आरोप पूर्णत: सही प्रतीत नहीं होता है.

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