डीएसइ ने माना : दो लोगों की नियुक्ति में हुई चूक
Updated at : 08 Mar 2016 8:10 AM (IST)
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अकेले सभी मामलों की जांच करना संभव नहीं था डीएसइ ने ‘प्रभात खबर’ को पत्र लिख अपना पक्ष रखा. कभी मानवीय भूल, तो कभी पदाधिकारियों को नियम को नजरअंदाज करने का दोषी बताया. कोडरमा : जिले में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में बरती गयी अनियमितता व नियमों की अनदेखी का मामला प्रभात खबर में प्रमुखता से […]
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अकेले सभी मामलों की जांच करना संभव नहीं था
डीएसइ ने ‘प्रभात खबर’ को पत्र लिख अपना पक्ष रखा. कभी मानवीय भूल, तो कभी पदाधिकारियों को नियम को नजरअंदाज करने का दोषी बताया.
कोडरमा : जिले में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में बरती गयी अनियमितता व नियमों की अनदेखी का मामला प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग बचाव में नजर आ रहा है.
अखबार में छपी खबरों पर विभाग की ओर से डीएसइ पीवी शाही ने उठाये गये सवालों के बिंदुवार जवाब दिये हैं, लेकिन अपने ही सवाल व जवाब में डीएसइ ने विभाग की ओर से हुई नियुक्ति प्रक्रिया में किस तरह लापरवाही व मनमानी बरती गयी, इसे स्पष्ट भी कर दिया है. अभ्यर्थी के दस प्रतिशत अंक बढ़ाये जाने के मामले में अजब-गजब जवाब दिये गये हैं. डीएसइ ने लिखा है कि अभ्यर्थी मीनाक्षी कुमारी की नियुक्ति पारा शिक्षिका पिछड़ी जाति में की गयी. उनके डीपीइ अंक में 3.41 के लिए 58.98 के स्थान पर 68.20 अंक अंकित किया गया है.
कार्यालय कर्मियों द्वारा डाटा प्रविष्टि में मानवीय भूल हुई है. यही नहीं, आरक्षण का लाभ देने के बावजूद जैसे-तैसे जांच किये बिना प्रमाण पत्रों पर हुई बहाली की भी पुष्टि खुद उनके पत्र में लिखी बातों से स्पष्ट हो रही है. डीएसइ की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है कि सविता कुमारी (पिता- रामवृक्ष राम) जिनका चयन अनुसूचित जाति कोटि में गैर पारा कक्षा छह से आठ के लिए विज्ञान अनुसूचित जाति हेतु किया गया था. सभी काउंसिलिंग पंजी का अवलोकन किया गया.
पाया गया कि उनके आवासीय प्रमाण पत्र जो शिक्षण हेतु निर्गत था जिस पर कोटि का आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है, काउंसिलिंग में शामिल पदाधिकारियों व कर्मियों के द्वारा इसे नजरअंदाज किया गया है. हालांकि, पत्र में डीएसइ ने अन्य शिक्षकों की नियुक्ति पर उठाये गये सवाल के जवाब में कहा है कि इनकी नियुक्ति नियमानुसार हुई है. इसमें रंजन कुमार गुप्ता, सारिका कुमारी, राजेंद्र प्रसाद, सत्य प्रकाश गोस्वामी, कुमारी मंजू भारती का नाम शामिल है. प्रदीप कुमार के बारे में उन्होंने लिखा है कि इनकी नियुक्ति अनारक्षित कोटि पारा के रूप में विधिवत की गयी थी.
टेट प्रमाणपत्र फरजी पाये जाने के बाद उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गयी है. डीएसइ ने लिखा है कि सात शिक्षकों की नियुक्ति सही तरीके से हुई, जहां तक सविता कुमारी व मीनाक्षी कुमारी की नियुक्ति का सवाल है यह नियुक्ति भूल के कारण हुई है, न कि किसी गलत उद्देश्य से.
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