अवैध उत्खनन से जिले की छवि खराब हुई

Updated at : 10 Apr 2018 2:44 AM (IST)
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अवैध उत्खनन से जिले की छवि खराब हुई

कोडरमा : झारखंड खनिज विकास निगम के तत्वावधान में बिरसा सांस्कृतिक भवन में जिले के ढिबरा भंडारों की नीलामी के लिए व्यवसायियों को आकर्षित करने को लेकर रोड शो का आयोजन किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि खान आयुक्त अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि पुराने समय से कोडरमा को अभ्रक नगरी […]

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कोडरमा : झारखंड खनिज विकास निगम के तत्वावधान में बिरसा सांस्कृतिक भवन में जिले के ढिबरा भंडारों की नीलामी के लिए व्यवसायियों को आकर्षित करने को लेकर रोड शो का आयोजन किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि खान आयुक्त अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि पुराने समय से कोडरमा को अभ्रक नगरी के नाम से जाना जाता है. वर्तमान समय में यहां विभिन्न क्षेत्रों में अवैध तरीके से ढिबरा, माइका व पत्थर का उत्खनन हो रहा है, जिससे पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है.
खान आयुक्त ने कहा कि सरकार इस मामले में काफी गंभीर है. आप लोगों की समस्याओं को देखते हुए सरकार बंद पड़े 14 ढिबरा डंप की नीलामी कर इच्छुक व्यवसायियों को देना चाह रही है. नीलामी की प्रक्रिया के नये नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए इस तरह का कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. सरकार की मंशा है कि बिना पर्यावरण को क्षति पहुंचाये नीलामी प्रक्रिया को पूरा किया जाये, ताकि यहां ढिबरा व अभ्रक व्यवसाय को पुनः विकसित कर कोडरमा के खोये अभ्रक के स्वर्णिम काल को दोबारा स्थापित किया जा सके. वैज्ञानिक तरीके से उतना ही उत्खनन हो, जितना की वर्तमान में जरूरत है, ताकि आनेवाली पीढ़ी भी इससे लाभान्वित हो सके. अवैध उत्खनन के कारण कोडरमा की छवि खराब हुई है, इसे बदलना होगा. इसके लिए आप लोगों को आगे आना है.
जब तक अवैध उत्खनन नहीं रुकेगा, तब तक तक वैध उत्खनन विकसित नहीं होगा. ढिबरा भंडारण क्षेत्र के नीलामी में जो भी कठिनाई है, उसे दूर करने का प्रयास किया जायेगा. रोड शो के दौरान जो भी सुझाव आये हैं, उसे सरकार के समक्ष रखा जायेगा. वहीं डीसी भुवनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार की यह पॉलिसी आनेवाले दिनों में इस जिले के लिए मील का पत्थर साबित होगा. अब लीज प्रक्रिया भी काफी सरल हो गया है.
उन्होंने व्यवसायियों को कहा कि आप लोग कलस्टर बनाकर नीलामी में शामिल हो, ताकि अधिक-से-अधिक लोग इसका लाभ उठा पायें. डीसी ने कहा कि एनजीटी की रिपोर्ट आने के बाद जिला प्रशासन अवैध उत्खनन को रोकने के लिए और अधिक गंभीरता से काम कर रही है. इसमें पकड़े जाने पर किसी को नहीं छोड़ा जायेगा. आनेवाले दिनों में यहां माइका म्यूजियम बनाया जायेगा. एसपी शिवानी तिवारी ने कहा कि आप लोगों की वर्षों की मांग पर सरकार गंभीर हुई है और पूरी गंभीरता के साथ ढिबरा व्यवसाय को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है. एक ओर सरकार के निर्देशानुसार ढिबरा के वैध उत्खनन के लिए जिला प्रशासन हरसंभव मदद के लिए तैयार है,
वहीं दूसरी ओर अवैध उत्खनन को हर-हाल में बंद करने के लिए प्रयासरत है. टास्क फोर्स लगातार कार्रवाई कर रही है. अवैध उत्खनन को रोक कर वैध को बढ़ावा देने में आप लोग सहयोग करें. कार्यक्रम को निदेशक जिओलॉजी कुमारी अंजली, उपनिदेशक मुकुल प्रसाद, डीएफओ सूरज कुमार सिंह समेत कई लोगों ने संबोधित किया. इस अवसर पर डीडीसी आलोक त्रिवेदी, एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार, एडीएमओ राजा राम प्रसाद, रेंजर एसके चौधरी, ललित कुमार, रूपक सिंह, पंकज सिंह, वीरेंद्र कुमार मेहता, राजू दास, शंभु प्रसाद यादव, मनोज कुमार, भीम साहू, राम रत्न महर्षि, राजेंद्र मोदी, कमल दारुका समेत भारी संख्या में ढिबरा, पत्थर व क्रशर व्यवसायी आदि मौजूद थे.
व्यवसायियों ने खुल कर रखी समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान ढिबरा व्यवसायियों ने खुल कर अपनी समस्याओं को रखा. साथ ही समाधान के उपाय भी बताए. व्यवसायी महेश दारुका ने कहा कि ढिबरा भंडारण क्षेत्र की नीलामी में नीलामी का रेट काफी अधिक है. उन्होंने कहा कि वे सरकार की मंशा का स्वागत तो करते हैं, मगर नीलामी का रेट काफी अधिक होने के कारण पिछली बार आयोजित नीलामी में व्यवसायी वर्ग शामिल नहीं हुए. राजेंद्र मोदी ने कहा कि बाजार में कोई नया प्रोडक्ट आता है, तो शुरुआत में उसकी कीमत कम होती है. बाद में जरूरत के आधार पर उसका मूल्य बढ़ाया जाता है. उसी प्रकार यदि राज्य सरकार बंद पड़े ढिबरा डंप को पुनः चालू करना चाहती है, तो उसका हम लोग स्वागत करते हैं, लेकिन नीलामी का रेट कम होना चाहिए. साथ ही किस डंप में कितना मीट्रिक टन ढिबरा का उत्खनन संभव है. इसकी जानकारी भी उपलब्ध रहना चाहिए. उन्होंने कोडरमा के स्वर्णिम काल को याद करते हुए कहा कि एक समय जिले में 4000 ओपेन माइका खदान यहां संचालित था और प्रत्येक माइंस में 400-500 मजदूर कार्यरत थे. पर्यावरण को क्षति नहीं पहुंचे, इसके लिए इस व्यवसाय में लगे सभी लोग इसका ख्याल रखते थे, मगर आज एक भी खदान संचालित नहीं है. इससे यहां के हजारों लोग बेरोजगार हो गये.
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