Torpa Vidhan Sabha: झारखंड पार्टी के गढ़ में भाजपा, कांग्रेस और झामुमो ने की सेंधमारी

Jharkhand Election 2024, सांकेतिक तरस्वीर
Torpa Vidhan Sabha: तोरपा विधानसभा क्षेत्र वर्ष 1957 में अस्तित्व में आया. इसके पहले यह खूंटी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था.
Torpa Vidhan Sabha|Jharkhand Assembly Election 202| तोरपा (खूंटी), सतीश शर्मा : अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित तोरपा विधानसभा क्षेत्र झारखंड पार्टी (झापा) का गढ़ माना जाता था. आजादी के बाद झारखंड पार्टी ने ही ताेरपा से सबसे अधिक विधायक दिये हैं. अब तक तोरपा से झारखंड पार्टी ने सात बार, भाजपा ने तीन व कांग्रेस और झामुमो ने दो-दो बार जीत हासिल की है.
तोरपा विधानसभा क्षेत्र वर्ष 1957 में अस्तित्व में आया. इसके पहले यह खूंटी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था. 1957 में पहली बार तोरपा विधानसभा सीट के लिए हुए चुनाव में झारखंड पार्टी के जूलियस मुंडा कांग्रेस की मरियम कुजूर को हराकर विधायक बने थे. इसके बाद 1962, 1972 व 1977 में झारखंड पार्टी के उम्मीदवार ही विधायक बने.

वर्ष 1980 में कांग्रेस पार्टी के लियेंद्र तिरु विधायक बने. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सुशीला केरकेट्टा को हराया था. इसके बाद झारखंड पार्टी के अध्यक्ष एनइ होरो वर्ष 2000 तक लगातार तोरपा से विधायक चुने जाते रहे. एनइ होरो तत्कालीन बिहार सरकार में मंत्री भी रहे. वर्ष 2000 में एनइ होरो भाजपा के कोचे मुंडा से हार गये. वहीं, 2005 में कोचे मुंडा ने भाजपा के टिकट पर फिर से जीत हासिल की.
वर्ष 2009 में झामुमो के पौलुस सुरीन ने कोचे मुंडा को हराया. सुरीन ने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीता था. वर्ष 2014 के चुनाव में पौलुस सुरीन जेल से बाहर आ गये थे. उन्होंने फिर से भाजपा को हराकर चुनाव जीता, लेकिन जीत का अंतर महज 43 वोट ही था. हालांकि, वर्ष 2019 का चुनाव जीतकर भाजपा के कोचे मुंडा ने वापसी कर ली.

सड़क व शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करायी : कोचे मुंडा
तोरपा के विधायक कोचे मुंडा ने कहा कि विगत पांच वर्षों में हर क्षेत्र में विकास का काम तेजी से हुआ. क्षेत्र की सड़कों को बेहतर बनाया गया है. शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करायी गयी है. वर्षों से लंबित पुल निर्माण का काम शुरू हुआ है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई काम हुए हैं. प्रत्येक प्रखंड में अस्पताल का नया भवन बनाया जा रहा है. आज कोई ऐसा गांव नहीं है, जहां जाने के लिए सड़कें न हों.

तोरपा में पलायन सबसे बड़ा मुद्दा
तोरपा विधानसभा क्षेत्र में पलायन एक बड़ा मुद्दा है. रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण क्षेत्र से हर वर्ष सैकड़ों लोग काम की तलाश में दिल्ली, मुंबई, गोवा जैसे शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं. गोवा के समुद्र तट पर काम करने वाले लोगों में बड़ी संख्या तोरपा के लोग हैं. इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब और सिक्किम, लद्दाख जैसे सुदूर राज्यों में भी तोरपा की जनता को काम की तलाश में जाना पड़ता है. पड़ोसी राज्यों के ईंट भट्ठों में भी क्षेत्र के लोग काफी संख्या में मिल जायेंगे. इसके अलावा तोरपा से गोविंदपुर वाया टाटी सड़क नहीं बन पायी. तोरपा को अनुमंडल तथा हुरदा को प्रखंड बनाने की मांग भी पूरी नहीं हुई है. तोरपा में स्टेडियम और डिग्री कॉलेज भी नहीं है.
जितना काम होना चाहिए, उतना नहीं हुआ : सुदीप गुड़िया

2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे झामुमो के सुदीप गुड़िया ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विकास के मामले में तोरपा विधानसभा क्षेत्र पिछड़ गया है. सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने में विधायक विफल रहे हैं. क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं हैं, परंतु विधायक उन समस्याओं के प्रति उदासीन रहे हैं. जनमुद्दों को सरकार के समक्ष रखने में विधायक असफल रहे हैं. जितना काम होना चाहिए, उतना नहीं हुआ.
2024 लोकसभा चुनाव में तोरपा में इन्हें मिले सर्वाधिक मत
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त मत |
| कालीचरण मुंडा | कांग्रेस | 79260 |
| अर्जुन मुंडा | भाजपा | 83840 |
तोपरा विधानसभा के अब तक के विधायक
| चुनाव का वर्ष | विधायक का नाम | पार्टी/दल का नाम |
| 1957 | जुलियस मुंडा | झारखंड पार्टी |
| 1962 | सामुएल मुंडा | झारखंड पार्टी |
| 1967 | एस पाहन | कांग्रेस |
| 1972 | वीर सिंह मुंडा | झारखंड पार्टी |
| 1977 | एनई होरो | झारखंड पार्टी |
| 1980 | लियेंन्द्र तिरु | कांग्रेस |
| 1985 | एनई होरो | झारखंड पार्टी |
| 1990 | एनई होरो | झारखंड पार्टी |
| 1995 | एनई होरो | झारखंड पार्टी |
| 2000 | कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2009 | पौलुस सुरीन | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| 2014 | पौलुस सुरीन | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| 2019 | कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी |
विधानसभा क्षेत्र की सड़कें जर्जर हैं. तोरपा-गोविंदपुर वाया टाटी रोड व अम्मापकना गिरूम रोड इसके उदाहरण हैं.
अनिल मिश्र
तोरपा विधानसभा चुनाव 2019 का परिणाम
| उम्मीदवार का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त वोट |
| कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी | 43482 |
| सुदीप गुड़िया | झारखंड मुक्ति मोर्चा | 33852 |
इस विधानसभा क्षेत्र के लोग अभी भी खेती के लिए मॉनसून पर निर्भर हैं. क्षेत्र में सिंचाई की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.
विजय बड़ाईक
तोरपा विधानसभा चुनाव 2014 का परिणाम
| उम्मीदवार का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त वोट |
| पौलुस सुरीन | झारखंड मुक्ति मोर्चा | 32003 |
| कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी | 31960 |
तोरपा में सरकारी डिग्री कॉलेज खुलना चाहिए, जहां बीएड व पीजी की पढ़ाई हो. उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को बाहर जाना पड़ता है.
धर्मेंद्र कुमार
तोरपा विधानसभा चुनाव 2009 का परिणाम
| उम्मीदवार का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त मत |
| पौलुस सुरीन | झारखंड मुक्ति मोर्चा | 34551 |
| कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी | 18752 |
क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर का सृजन होना चाहिए. तकनीकी शिक्षण संस्थान खुले विद्यार्थियों को बाहर नहीं जाना पड़े.
यशवंत कुमार
तोरपा विधानसभा चुनाव 2005 का परिणाम
| उम्मीदवार का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त मत |
| कोचे मुंडा | भारतीय जनता पार्टी | 28965 |
| एनई होरो | झारखंड पार्टी | 20833 |
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By Mithilesh Jha
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