सबसे अधिक 12 लोकसभा चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड कड़िया मुंडा के नाम, आठ बार बने हैं खूंटी के सांसद

कड़िया मुंडा के नाम सबसे अधिक 12 लोकसभा चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड है. उन्होंने आठ बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की है. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया.
सुनील कुमार झा, रांची : राज्य में सबसे अधिक 12 लोकसभा चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड कड़िया मुंडा के नाम है. खूंटी लोकसभा सीट वर्ष 1967 में अस्तित्व में आया. इसके बाद 1971 में कड़िया मुंडा ने पहला चुनाव लड़ा. 2014 में उन्होंने अंतिम लोकसभा चुनाव लड़ा था. इस दौरान उन्होंने आठ चुनाव में जीत दर्ज की, जबकि चार में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. श्री मुंडा को अपने पहले चुनाव (1971) में हार का समाना करना पड़ा था. पहले चुनाव श्री मुंडा ने भारतीय जन संघ के टिकट पर लड़ा था, पहले चुनाव में उन्हें 46675 वोट मिले थे. 1977 के आम चुनाव उन्हें जीत मिली और पहली बार सासंद बन दिल्ली पहुंचे. 1977 में उन्हें 91859 वोट मिले थे.
इसके बाद हुए लगातार दो चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 1980 व 1984 के चुनाव में वे हार गये. श्री मुंडा 1984 में तीसरे स्थान पर पहुंच गये थे. भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद वे पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 1984 के चुनाव में कांग्रेस के साइमन तिग्गा को यहां से जीत मिली थी. जबकि निर्दलीय उम्मीदवार मिरल एनेम होरो दूसरे स्थान पर रह थे. कड़िया मुंडा को 17.69 फीसदी वोट पाकर तीसरे स्थान रहे थे.
1977 में मिला सबसे अधिक वोट फिर 2009 में 41.2 फीसद वोट मिला
1977 में कड़िया मुंडा को सबसे अधिक 49.99 फीसदी वोट मिले थे. वर्ष 1971 से लेकर 2014 के बीच सभी चुनाव में उन्हें इस चुनाव में ही सबसे अधिक वोट मिले थे. इसके बाद वर्ष 2009 के चुनाव में उन्हें 41.2 फीसदी वोट मिले थे. इसके बाद 2014 के चुनाव में उन्हें 36.5 फीसदी वोट मिले थे.
मोरारजी देसाई की सरकार में पहली बार मंत्री बनाये गये
कड़िया मुंडा वर्ष 1977 में पहली बार मोरारजी देसाई की सरकार में मंत्री बने. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्र में मंत्री रहे. वर्ष 2009 में उन्हें लोकसभा का उपाध्यक्ष चुना गया.
लगातार पांच चुनाव में दर्ज की जीत
1984 में मिली हार के बाद श्री मुंडा ने अगले पांच लोकसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज की. इसके बाद 1989 से 1999 के बीच हुए पांच चुनाव में वे सांसद चुने गये. वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद हुए वर्ष 2004 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में खिजरी सीट पर जीत दर्ज कर विधायक बने थे. वर्ष 2009 और 2014 में हुए चुनाव में उन्होंने फिर जीत दर्ज की.
कड़िया मुंडा का सफर
वर्षरिजल्ट
1971 हार
1977 जीत
1980 हार
1984 हार
1989 जीत
1991 जीत
वर्षरिजल्ट
1996 जीत
1998 जीत
1999 जीत
2004 हार
2009 जीत
2014 जीत
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