आदिवासी विरासत को बचायें

Updated at : 10 Aug 2016 7:27 AM (IST)
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आदिवासी विरासत को बचायें

आयोजन : समारोहपूर्वक मनाया गया आदिवासी दिवस खलारी : एसीसी क्लब खलारी में विश्व आदिवासी दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख सोनी तिग्गा तथा संचालन रंथू उरांव ने किया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आदिवासी सरना महासभा रांची के सचिव विकास मिंज तथा विशिष्ट अतिथि डीएसपी प्रमोद कुमार केशरी, बीडीओ रोहित सिंह व […]

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आयोजन : समारोहपूर्वक मनाया गया आदिवासी दिवस
खलारी : एसीसी क्लब खलारी में विश्व आदिवासी दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख सोनी तिग्गा तथा संचालन रंथू उरांव ने किया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आदिवासी सरना महासभा रांची के सचिव विकास मिंज तथा विशिष्ट अतिथि डीएसपी प्रमोद कुमार केशरी, बीडीओ रोहित सिंह व सीओ सच्चिदानंद कुमार वर्मा उपस्थित थे.
अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की. इससे पूर्व सभी अतिथियों को बुके देकर तथा आदिवासी परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया. समारोह में खोड़हा टीमों तथा बाहर से आये कलाकारों ने नागपुरी गीत-नृत्य प्रस्तुत किया. मांदर की थाप पर जनप्रतिनिधि भी खूब झूमे. इस मौके पर खलारी पुलिस इंस्पेक्टर राजदेव प्रसाद, सीआइ हरेंद्र कुमार सिंह, कल्याण पदाधिकारी, मुखिया सोमरी राम, आशा देवी, पुतुल देवी, पुष्पा खलखो, गोविंद उरांव, सुशीला देवी, मानसी देवी, शांति देवी, रामो देवी, प्रदीप उरांव, बसंती देवी, पंसस कृष्णा राम, सिन्नी समाड, मुन्ना देवी, मीना कुमारी, उर्मिला देवी, निमिया देवी, बूटन मुंडा के अलावे तेजी किस्पोट्टा, देवपाल मुंडा, बसंत पंकज, महेंद्र उरांव, मन्ना खेस, विकास कुमार सिंह, दिलीप पासवान, बाबूलाल गंझू, रोहित बाड़ा, आशिया परवीन सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.
विकास से ही आदिवासी दिवस की सार्थकता :विश्व आदिवासी दिवस समारोह में मुख्य अतिथि विकास मिंज ने कहा कि आदिवासियों के विकास से ही आदिवासी दिवस की सार्थकता पूरी हो सकती है.
वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन हुआ. इसके 50 वर्ष बाद यूएनओ ने विश्व आदिवासी दिवस मनाने का फैसला किया. 9 अगस्त 1994 को पहला विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. यूएनओ ने एक सर्वे में पाया कि विश्व के मूलवासी विकास में दूसरे लोगों से पिछड़ रहे हैं. इसके बाद ही विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की गयी.
इसका उद्देश्य है कि हर साल इस दिवस के बहाने ही हम आदिवासियों के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक हालात की समीक्षा कर सकेंगे. प्रमुख सोनी तिग्गा ने कहा कि आदिवासी समाज सभी को जोड़ने का काम करती है. आदिवासी समाज को आज अपनी संस्कृति और सभ्यता को बचाये रखने की आवश्यकता है. बीडीओ रोहित सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक हैं, लेकिन आज प्रकृति का दोहन करनेवाले आगे बढ़ रहे हैं. आदिवासी अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखें. जल, जंगल व जमीन की रक्षा से ही धरती पर जीवन भी बचेगा. सीओ सच्चिदानंद वर्मा ने कहा कि आदिवासियों ने शुरू से ही जल, जंगल व जमीन की रक्षा कर प्रकृति के साथ मानवता को बचाया है.
डीएसपी रोहित सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से आदिवासियों के लिए अनेक लाभकारी योजनाएं हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में इन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. डीएसपी ने कहा कि यह जिम्मेवारी जनप्रतिनिधियों की भी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उन्हें जागरूक करें.
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