झारखंड : पत्थलगड़ी मामला, ग्रामसभा की बैठक में लिया निर्णय, ग्रामीणों ने दो सरकारी विद्यालय एक आंगनबाड़ी को कराया बंद

Updated at : 20 Apr 2018 7:11 AM (IST)
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झारखंड : पत्थलगड़ी मामला, ग्रामसभा की बैठक में लिया निर्णय, ग्रामीणों ने दो सरकारी विद्यालय एक आंगनबाड़ी को कराया बंद

खूंटी : खूंटी के अड़की प्रखंड स्थित कुरूंगा गांव में गुरुवार को ग्रामसभा कर पत्थलगड़ी समर्थकों ने नया फरमान जारी किया है. कुरूंगा गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय और गांव के पहानटोली स्थित प्राथमिक विद्यालय को बंद करा दिया है. ग्रामीणों ने स्कूल के नाम और अन्य दीवार लेखन को मिटा दिया है. इसके अलावा […]

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खूंटी : खूंटी के अड़की प्रखंड स्थित कुरूंगा गांव में गुरुवार को ग्रामसभा कर पत्थलगड़ी समर्थकों ने नया फरमान जारी किया है. कुरूंगा गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय और गांव के पहानटोली स्थित प्राथमिक विद्यालय को बंद करा दिया है. ग्रामीणों ने स्कूल के नाम और अन्य दीवार लेखन को मिटा दिया है.
इसके अलावा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र को भी बंद कर दिया है. ग्रामसभा के सचिव बलराम समद और जोन जुनास तिड़ू ने बताया कि स्कूल में एक शिक्षक और एक पारा शिक्षक नियुक्त हैं. दोनों लगातार गायब रहते हैं. बच्चों को अपना नाम लिखना भी नहीं आता. बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है. हम अपने बच्चों को ग्रामसभा में ही पढ़ायेंगे. पिछले एक सप्ताह से कक्षा भी शुरू कर दी गयी है. ग्रामसभा के इस स्कूल में फिलहाल 35 बच्चे पढ़ रहे हैं.
जैक की तरह होगा बोर्ड : उन्होंने बताया : कुरूंगा में आदिवासी बोर्ड का गठन किया गया है. इसी बोर्ड से शिक्षक नियुक्त किये जायेंगे. फिलहाल एक शिक्षक नियुक्त किया गया है. अपना सिलेबस भी तैयार किया जा रहा है. यह सिलेबस भी बाजार में जल्द उपलब्ध होगा. आदिवासी बोर्ड फिलहाल पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई करा रहा है. जिस तरह से झारखंड एकेडमिक काउंसिल है, उसी तरह से हमलोग देश भर के आदिवासियों के लिए अलग से आदिवासी बोर्ड का गठन करेंगे.
चलेगी अपनी शिक्षा व्यवस्था : ग्राम सभा को संबोधित करते हुए आदिवासी महासभा के जोन जुुनास तिड़ू ने कहा : जिन गांवों में नये किस्म की पत्थलगड़ी हुई है, वहां अपनी शिक्षा व्यवस्था चलेगी. हमारी ग्रामसभा की ओर से जारी जाति व आवासीय प्रमाण पत्र को स्कूलों में स्वीकार नहीं किया जा रहा है़
इसलिए हम भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं भेजेंगे. आदिवासी बोर्ड गांव में ही रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार बच्चों को पढ़ायेगा. आंगनबाड़ी, टीकाकरण सहित अन्य सभी सरकारी सुविधाएं नहीं ली जायेंगी. पलामू में टीकाकरण के कारण चार बच्चों की मौत हो गयी थी. टीका बच्चों के लिए नुकसानदायक है. पोलियो तक की दवा नहीं पिलाई जायेगी.
आदिवासी महासभा के नेताओं की गिरफ्तारी से फर्क नहीं पड़ा : ग्रामसभा के सचिव बलराम समद ने कहा : आदिवासी महासभा के कई शीर्ष नेताओं के पकड़े जाने के बाद पत्थलगड़ी अभियान को कोई फर्क नहीं पड़ा है. एक महीने के अंदर फिर से पत्थलगड़ी की जायेगी.
आदिवासी महासभा के अध्यक्ष विजय कुजूर के बयान पर उन्होंने कहा कि हम उन्हें अपना सीनियर मानते हैं. उन्होंने स्कूल बंद करने, पोलियाे दवा नहीं पिलाने को लेकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन इसे बंद करने का फैसला ग्रामसभा का है. हम सरकारी योजनाओं को स्वीकार नहीं करेंगे. मुखिया या किसी जनप्रतिनिधि पर इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं है. अगर ग्रामसभा से चयनित किसी योजना को लाया जाता है, तो ठीक है, पर मुखिया खुद से कोई योजना लायेंगे, तो उसे स्वीकार नहीं किया जायेगा.
सरकार से आरपार की लड़ाई
जोन जुुनास तिड़ू ने कहा : सरकार से आरपार की लड़ाई है. हम अपनी लड़ाई संविधान के तहत लड़ेंगे. आदिवासियों को एकजुट होना होगा. ग्रामसभा को मजबूत करना होगा. हम स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा नहीं लेंगे. जब तक पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के लिए राज्यपाल द्वारा लोक अधिसूचना जारी नहीं की जाती है, चुनाव में भी हिस्सा नहीं लेंगे.
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