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नगर निकाय चुनाव पर भाजपा में बगावत, डैमेज कंट्रोल में जुटी पार्टी

Updated at : 04 Feb 2026 2:44 PM (IST)
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Jharkhand Civic Polls

नगर निकाय चुनाव को लेकर झारखंड भाजपा में बगावत शुरू. कैरिकेचर: अरिंदम

Jharkhand Civic Polls: झारखंड नगर निकाय चुनाव में भाजपा के भीतर बगावत खुलकर सामने आई है. समर्थित उम्मीदवारों के ऐलान के बाद धनबाद, मेदिनीनगर और गढ़वा में असंतोष बढ़ा है. डैमेज कंट्रोल के लिए केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय है. समय रहते समाधान नहीं हुआ तो विपक्षी दलों को चुनावी लाभ मिल सकता है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से सतीश कुमार की रिपोर्ट

Jharkhand Civic Polls: झारखंड में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. भले ही यह चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा हो, लेकिन बैकडोर से सियासत पूरी तरह सक्रिय है. भाजपा ने मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा की, लेकिन इसी के साथ पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया. टिकट चयन से नाराज कई पुराने नेता और कार्यकर्ता बागी तेवर अपनाते नजर आ रहे हैं, जिससे भाजपा नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

डैमेज कंट्रोल की कमान केंद्रीय नेतृत्व के हाथ

भाजपा के भीतर बढ़ते अंतर्कलह को देखते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मोर्चा संभाल लिया है. राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा को मैदान में उतारा गया है. ये नेता सीधे बागी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे. पार्टी की रणनीति साफ है—मान-मनौव्वल के जरिए बागियों को नामांकन वापस लेने के लिए राजी करना, ताकि वोटों का बिखराव रोका जा सके और पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को नुकसान न हो.

धनबाद में सबसे ज्यादा सियासी उलझन

कोयलांचल की राजनीति में भाजपा की राह सबसे ज्यादा कठिन दिख रही है. धनबाद में पार्टी ने संजीव अग्रवाल को अधिकृत समर्थन दिया है, लेकिन इस फैसले ने असंतोष को हवा दे दी. पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल ने भाजपा से किनारा कर झामुमो का दामन थाम लिया है. वहीं, पूर्व विधायक संजीव सिंह और धनबाद सांसद ढुल्लू महतो की पत्नी सावित्री देवी के नामांकन की तैयारी से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. इससे भाजपा की स्थिति और असहज हो गई है.

मेदिनीनगर में भी उभरी बगावत

मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव में भी भाजपा को भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है. यहां पार्टी ने अर्चना शंकर को समर्थन दिया है, लेकिन पूर्व जिला अध्यक्ष परशुराम ओझा की पत्नी जानकी ओझा, जय श्री गुप्ता और मंगल सिंह की पत्नी दरिंकु सिंह भी मैदान में उतर गई हैं. इससे साफ है कि पार्टी के अंदर टिकट वितरण को लेकर असंतोष गहराया हुआ है और एकजुटता की कमी दिख रही है.

गढ़वा में पुराने नेता भी मैदान में

गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने कंचन जायसवाल को समर्थन दिया है. इसके बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता अलखनाथ पांडेय ने भी अध्यक्ष पद के लिए आवेदन कर दिया है. गौरतलब है कि अलखनाथ पांडेय वर्ष 2009 में भाजपा टिकट पर गढ़वा विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. ऐसे में यहां भी पार्टी को अपनों से ही चुनौती मिल रही है.

गोड्डा में तटस्थ रहने का फैसला

गोड्डा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने किसी भी उम्मीदवार को समर्थन नहीं देने का निर्णय लिया है. कोर कमेटी के समक्ष आए नामों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण पार्टी ने तटस्थ रहने का रास्ता चुना. चयन प्रक्रिया में इस बार जिला अध्यक्षों को अधिक तवज्जो दी गई थी और मंडल प्रभारियों की राय के बाद कोर कमेटी ने मंथन किया, लेकिन जमीनी हकीकत और पार्टी की पसंद के बीच फासला साफ नजर आया.

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असंतोष न सुलझा तो विपक्ष को फायदा

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते बागियों को नहीं मनाया गया, तो इसका सीधा फायदा झामुमो और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को मिल सकता है. नगर निकाय चुनाव में अंदरूनी कलह भाजपा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. अब देखना होगा कि केंद्रीय नेतृत्व का डैमेज कंट्रोल कितना असरदार साबित होता है और पार्टी अपनों की बगावत पर कितना काबू पा पाती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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