Nirmala Sitharaman Attire : क्या इस बार बजट पर चलेगा बंगाल की बालूचरी साड़ी का जादू?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
Nirmala Sitharaman Attire : बजट से पहले इस बात की खूब चर्चा होने लगी है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार अपने पहनावे में कौन सी साड़ी शामिल करेंगी और उनका संदेश क्या होगा? एक ओर तो बंगाल में विधानसभा चुनाव होना है, वहीं मिडिल क्लास वित्तमंत्री से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है. ऐसे में वित्तमंत्री किस तरह ऊर्जावान होने का संदेश देती हैं, यह देखने वाली बात होगी.
Nirmala Sitharaman Attire : देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2026–27 का बजट 1 फरवरी को पेश करेंगी. बजट पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि हर वर्ग यह जानना चाहता है कि इस बजट में उसे क्या मिला. बजट के साथ–साथ 1 फरवरी को एक और चीज पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी, वो है निर्मला सीतारमण का अटायर. सभी यह जानना चाहते हैं कि अपने करियर के 9वें बजट में निर्मला सीतारमण अपने पहनावे से क्या संदेश देंगी.
क्या निर्मला सीतारमण के अटायर में छिपा होगा चुनावी संदेश?
निर्मला सीतारमण ने जब अपने करियर का 8वां बजट 2025 में पेश किया था, तो उन्होंने मधुबनी पेंटिंग से सजी सिल्क की साड़ी पहनी थी. यह साड़ी उन्हें मधुबनी पेंटिंग की महारथी दुलारी देवी ने गिफ्ट की थी. निर्मला सीतारमण ने वह साड़ी बहुत ही स्नेह के साथ पहनी थी. चूंकि 2025 में बिहार में चुनाव होना था, इसलिए निर्मला सीतारमण के वेशभूषा को चुनाव से जोड़ा गया. यह संयोग ही है कि इस बार भी बंगाल में चुनाव होना है और बीजेपी इस चुनाव को जीतने के लिए एड़ी–चोटी एक कर रही है. ऐसे में सब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या इस बार भी निर्मला सीतारमण चुनावी राज्य से जुड़ी साड़ी पहनेंगी.
बंगाल की कौन सी साड़ी पहन सकती हैं निर्मला सीतारमण
बंगाल और साड़ी का अटूट संबंध है. यहां कई तरह की साड़ियां मौजूद हैं, जो यहां के कारीगरों की शान हैं. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आत्म निर्भर भारत का संदेश देने के लिए हैंडलूम की साड़ियों को प्रमोट करती रही हैं. इस बार भी अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उनके पास बंगाल की कुछ साड़िया हैं, जिन्हें वे अपनी अटायर में शामिल कर सकती हैं.

बालूचरी साड़ी : बालूचरी साड़ी बंगाल की शान है. इस साड़ी का जन्म बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ है. इस साड़ी की खासियत यह है कि इसके पल्लू और बॉर्डर में रामायण, महाभारत की कहानियां बनाई जाती हैं. इन साड़ियों के जरिए कई कहानियां कही जाती रही हैं. यह साड़ी बंगाल की पहचान कही जा सकती है. बालूचरी सिल्क की साड़ी निर्मला सीतारमण के व्यक्तित्व पर फिट भी बैठेगी और यह रामायण महाभारत से भी जुड़ी है, जो बीजेपी के कोर एजेंडे के हिसाब से सटीक भी है.
तांत की साड़ी : तांत की साड़ी बंगाल के पहचान से जुड़ी है और काफी लोकप्रिय भी है. तांत की साड़ी बंगाल के आमलोगों की साड़ी है और यह यहां सबसे ज्यादा पहनी भी जाती है. यह साड़ी काफी हल्की होती और दिखने में इसके रंग बहुत सुंदर होते हैं. यह सूती और सिल्क दोनों ही रूपों में मिलती है.
कांथा साड़ी : बंगाल की कांथा साड़ी हाथ से किए गए कढ़ाई के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है. इस साड़ी में कई लोक कथाओं को भी चित्रित किया जाता है. लेकिन निर्मला सीतारमण 2024 में यह साड़ी पहन चुकी हैं, इसलिए वो दोबारा इसका चुनाव करेंगी इसकी संभावना कम है.
निर्मला सीतारमण ने अबतक कौन–कौन सी साड़ी पहनकर पेश किया है बजट?
निर्मला सीतारमण ने अबतक बजट पेश करने के दौरान जिन साड़ियों को पहना है, वो एक खास मैसेज देती हैं. मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत के संदेश को उन्होंने अपने अटायर के जरिए पेश किया है. उन्होंने देश के विभिन्न इलाकों के कारीगरों के हुनर को दिखाने के लिए हैंडमेड साड़ियों को प्रमुखता दी है और उनकी कला को सम्मान भी दिया है. आइए जानते हैं उन्होंने कब–कब कौन सी साड़ी पहनी.
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- 2025 (8वां बजट): गोल्डन बाॅर्डर वाली ऑफ-व्हाइट मधुबनी पेंटिंग से सजी साड़ी. यह साड़ी बिहार के कलाकारों को समर्पित थी.
- 2024 (7वां बजट): आंध्र प्रदेश की चमकीले मैजेंटा बॉर्डर वाली ऑफ-व्हाइट मंगलागिरी साड़ी.
- 2024 (6वां बजट – अंतरिम): पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई वाली नीली तसर सिल्क साड़ी.
- 2023 (5वां बजट): कर्नाटक के पारंपरिक कला को दिखाने वाली काली कसुती एम्ब्रॉयडरी वाली लाल सिल्क साड़ी.
- 2022 (चौथा बजट): ओडिशा की बोमकाई मैरून साड़ी.
- 2021 (तीसरा बजट): लाल और ऑफ-व्हाइट पोचमपल्ली सिल्क साड़ी. यह तेलंगाना से जुड़ी साड़ी है.
- 2020 (दूसरा बजट): हरे रंग की लाइन वाले बॉर्डर वाली चमकीली पीली सिल्क साड़ी.
- 2019 (पहला बजट): गोल्डन बॉर्डर वाली सिंपल, चमकीली गुलाबी मंगलागिरी सिल्क साड़ी. यह साड़ी आंध्रप्रदेश से जुड़ी है और वित्तमंत्री की पहली पसंद भी है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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