झारखंड हाईकोर्ट सख्त: यौन हिंसा मामलों में Zero FIR अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
Published by : Priya Gupta Updated At : 09 Jun 2026 12:22 PM
झारखंड हाईकोर्ट
Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने यौन हिंसा और पॉक्सो मामलों में पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया है कि जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी और पीड़ितों को त्वरित न्याय, मुआवजा व पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा.
राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने महिलाओं और यौन हिंसा की पीड़िताओं के अधिकारों, सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका मामले में राज्य सरकार, पुलिस विभाग और संबंधित एजेंसियों को कई अहम निर्देश दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी संज्ञेय अपराध, विशेषकर यौन हिंसा और POCSO मामलों में, क्षेत्राधिकार का हवाला देकर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकता और Zero FIR दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है. मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 8 जून 2026 को सुनाए गए फैसले में कहा कि Zero FIR दर्ज नहीं करना कानून के उल्लंघन के समान है.
Zero FIR दर्ज करने में लापरवाही पर अदालत सख्त
झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को BNSS 2023 की धारा 173 के तहत Zero FIR दर्ज करने की व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. इसके साथ ही अदालत ने पुलिसकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने के भी आदेश दिए हैं. साथ ही, अदालत ने महिला और बाल विकास विभाग को राज्यभर में वन-स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि इन केंद्रों की निगरानी के लिए एक समिति बनाई जाए ताकि मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित हो सके.
यौन हिंसा पीड़ितों के लिए राहत और पुनर्वास पर जोर
हाईकोर्ट ने यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए सरकार को और प्रभावी कदम उठाने को कहा है. अदालत ने पाया कि कई मामलों में पीड़ितों को समय पर सहायता नहीं मिलती, जिससे प्रक्रिया प्रभावित होती है. इसलिए अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को तुरंत कानूनी और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए.
दुष्कर्म पीड़ित बच्चों को मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्ति का आदेश
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि हर जिले में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो दुष्कर्म से जन्मे बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास की निगरानी करेगा. ऐसे बच्चों को बारहवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी.वहीं, यदि कोई छात्र आईआईटी, एनआईटी, एम्स या आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करता है, तो उसे उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति का लाभ भी दिया जाए.
प्रमुख निर्देश और व्यवस्था
- हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे की शुरुआत में ही ट्रायल कोर्ट यह तय करे कि पीड़िता को अंतरिम राहत देने की जरूरत है या नहीं.
- मामले का अंतिम फैसला चाहे किसी भी रूप में आए, पीड़िता के लिए अंतिम मुआवजा तय करना जरूरी होगा.
- मुआवजे की राशि का भुगतान 30 दिनों के अंदर करने का निर्देश दिया गया है.
- यौन अपराध से जुड़े मामलों का निपटारा तय समयसीमा में हो और इसके लिए बीएनएसएस की धारा 346 का पालन किया जाए.
- अदालतों को बेवजह तारीख पर तारीख देने से बचने को कहा गया है, ताकि मामलों का जल्द निष्पादन हो सके.
- पुलिस महानिदेशक को एक विशेष निगरानी दल बनाने का निर्देश दिया गया है, जो समय-समय पर ऐसे मामलों की समीक्षा करेगा.
- मीडिया, पुलिस और न्यायालय से जुड़े सभी कर्मियों को पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा.
- पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने या उसकी गोपनीयता भंग करने वालों पर सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
- दुष्कर्म के मामलों की प्रारंभिक जांच 15 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा गया है.
- अंतिम जांच दो महीने के अंदर समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है.
- सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पीड़ितों को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
- पॉक्सो से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर आश्रय, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करनी होगी.
- यौन अपराध से पीड़ित महिलाओं और बच्चियों का बयान महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही दर्ज किया जाएगा.
- सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिबंधित चिकित्सीय जांच पद्धति पर पूरी तरह रोक लगाने और उसका सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया गया है.
- अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रतिबंध का उल्लंघन गंभीर पेशेवर कदाचार माना जाएगा.
- दूरस्थ क्षेत्रों की किशोरियों और महिलाओं के लिए कानूनी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
- स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने पर जोर दिया गया है.
- यदि किसी पीड़िता और उसके परिवार को सामाजिक कारणों से स्थान बदलना पड़े, तो सरकार उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था करेगी.
- महिला हेल्पलाइन 181 को और अधिक प्रभावी बनाने तथा उसे आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है.
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प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.
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