हमें अभिमान नहीं, कर्म करना चाहिए : गौरहरि दास

नाला. बंदरडीहा पंचायत अंतर्गत पिंडारगड़िया गांव में सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा जारी है.
नाला. बंदरडीहा पंचायत अंतर्गत पिंडारगड़िया गांव में सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा जारी है, पांचवें दिन आनंद धाम के कथावाचक गौर हरि दास बाबाजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला, गोवर्धन पर्वत धारण, पुतना वध का सप्रसंग वर्णन किया. कहा कि भगवान श्री कृष्ण जब मात्र छह दिन के थे, तभी से उन्होंने लीलाएं की. इधर, राजा कंस की चिंताएं दिनों दिन बढ़ती जा रही थी उसे मृत्यु भय सता रहा था. राजा कंस ने गोकुल में नवजात से लेकर छोटे बच्चों को मारने का निश्चय किया. इसलिए उन्होंने पुतना नामक राक्षसी को गोकुल भेजा. पुतना अपनी मायावी शक्ति से राक्षस वेश त्याग कर मनोहर स्त्री का रूप धारण कर स्तन में कालकुट विष लेपकर आकाश मार्ग से गोकुल पहुंची. वहां वह नंदालय में भगवान श्री कृष्ण को मारने के लिए छल से उसके पास गयी और गोद में उठा लिया. भगवान अंतरयामी हैं. यह कथा हमें सिखाती है कि हमें अभिमान नहीं कर्म करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से मन शांत होता है.
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