निकेश सिन्हा, नारायणपुर. ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार की ओर से बनाए गए भवनों की हकीकत कई बार व्यवस्था की लापरवाही को उजागर कर देती है. नारायणपुर प्रखंड के शहरपुर गांव में वर्ष 2014 में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन इसका उदाहरण है. हैरानी की बात यह है कि आलिशान भवन बने पूरे 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका है. इससे भी चौंकाने वाला तथ्य यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास ही इस भवन के निर्माण और अस्तित्व की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. भवन के मुख्य द्वार पर बड़े अक्षरों में “स्वास्थ्य उपकेंद्र, शहरपुर” लिखा हुआ है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि इसका निर्माण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही किया गया था. बावजूद इसके, विभागीय उदासीनता और आपसी समन्वय की कमी के कारण यह भवन आज तक हैंडओवर नहीं हो सका. नतीजतन, लाखों रुपये की लागत से बना यह सरकारी ढांचा धूल फांक रहा है और धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. भवन परिसर की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है. चारों ओर घास-फूस, झाड़ियां और छोटे-छोटे पेड़ उग आए हैं, जिससे यह इलाका जंगल जैसा प्रतीत होता है. स्थानीय ग्रामीण भवन के आसपास गोबर के उपले सुखाने को मजबूर हैं. इससे न केवल भवन की गरिमा धूमिल हो रही है, बल्कि सरकारी संपत्ति के प्रति लापरवाही भी साफ झलकती है. शहरपुर गांव एक बड़ी आबादी वाला गांव है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा की सख्त जरूरत है. वर्तमान में ग्रामीणों को इलाज के लिए बादलपुर गांव स्थित स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है, जो शहरपुर से काफी दूरी पर है. आपात स्थिति में मरीजों को वहां तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन का संचालन शुरू हो जाए, तो उन्हें प्राथमिक उपचार, टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं गांव में ही मिल सकती हैं. इससे न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि समय पर इलाज मिलने से कई गंभीर समस्याओं से भी बचा जा सकेगा. स्थानीय लोगों ने इसे सरकारी धन का खुला दुरुपयोग बताया है. उनका कहना है कि जब भवन बनाने में लाखों रुपये खर्च किए गए, तो उसका उपयोग सुनिश्चित करना भी प्रशासन और विभाग की जिम्मेदारी थी. लेकिन 12 वर्षों तक भवन का उपयोग न होना, सिस्टम की गंभीर खामी को दर्शाता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की जांच कर जल्द से जल्द भवन को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया जाए और उपकेंद्र का संचालन शुरू कराया जाए. साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह से सरकारी संसाधनों की बर्बादी न हो.
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी :
शहरपुर स्वास्थ्य उप केंद्र भवन की जानकारी विभाग को नहीं है. इसका निर्माण किस विभाग से हुआ है, इसका हमारे पास कोई डाटा उपलब्ध नहीं है. अगर हमें भवन निर्माण के बाद हैंडओवर किया होता तो इसकी जानकारी होती.– मुकेश कुमार, बीएम, सीएचसी नारायणपुर.B
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