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संताल सिविल रूल्स में संशोधन का जताया विरोध

Updated at : 12 Nov 2025 9:06 PM (IST)
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संताल सिविल रूल्स में संशोधन का जताया विरोध

कुंडहित. प्रखंड कार्यालय के समक्ष बुधवार को मांझी परगना सरदार महासभा कुंडहित ईकाई ने धरना प्रदर्शन किया.

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मांझी परगना सरदार महासभा ने कुंडहित मुख्यालय में दिया धरना प्रतिनिधि, कुंडहित. प्रखंड कार्यालय के समक्ष बुधवार को मांझी परगना सरदार महासभा कुंडहित ईकाई ने धरना प्रदर्शन किया. संताल सिविल रूल्स 1946 व संताल परगना जस्टिस रेग्युलेशन 1893 में संशोधन के प्रस्ताव का विरोध किया. साथ ही पेसा कानून 1996 को झारखंड में लागू करने, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था आतो बैसी के पदधारकों मांझी, नाईकी, पाराणिक, भोद्दो, गोडेत, जोगमांझी, कुडाम नाईकी, लासेरसाल और जोग पाराणिक को सम्मान राशि प्रदान करने की मांग की. धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता महासभा के प्रखंड अध्यक्ष सह बीर मांझी हराधन मुर्मू ने की, जबकि संचालन मांझी बाबा बाबूधन मरांडी ने किया. बतौर मुख्य अतिथि महासभा के संरक्षक सुनील कुमार बास्की व विशिष्ट अतिथि जिलाध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा, जिला उपाध्यक्ष महादेव हांसदा और समाजसेवी लेबेन हांसदा उपस्थित थे. मुख्य अतिथि ने कहा कि संताल विद्रोह 1855 के बाद अंग्रेजों ने संताल और पहाड़िया समाज की प्रशासनिक एवं न्यायिक सुरक्षा के लिए संताल सिविल रूल्स 1946 और संताल परगना जस्टिस रेग्युलेशन 1893 बनाए थे. सरकार आज इन दोनों कानूनों की समीक्षा कर रही है, जिससे संताल और पहाड़िया समाज के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से भेजी गयी समीक्षा रिपोर्ट हास्यास्पद है, जिसमें स्थानीय परंपरागत ट्राइबल काउंसिल और परगना व्यवस्था को निष्क्रिय बताया गया है. कहा कि समीक्षा के दौरान मांझी-नाईकी या समाज के बुद्धिजीवियों को बुलाने के बजाय राजस्व प्रधानों से राय ली गयी, जो संताल समाज की परंपराओं से अनभिज्ञ हैं. उन्होंने कहा कि मांझी प्रधान हो सकता है, लेकिन प्रधान मांझी नहीं हो सकता, क्योंकि दोनों की भूमिका अलग-अलग है. विशिष्ट अतिथि ने कहा कि झारखंड सरकार को पेसा कानून 1996 अविलंब लागू करना चाहिए. उन्होंने बताया कि देश के दस राज्यों में यह कानून पहले से लागू है, परंतु झारखंड में अब तक टालमटोल की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा मांझी, नाईकी, पाराणिक, जोगमांझी, कुडाम नाईकी और गोडेत को सम्मान राशि देने का प्रावधान तो है, परंतु 95 प्रतिशत पदधारियों को अब तक राशि नहीं मिली है. उन्होंने भोद्दो, लासेरसाल, जोगपाराणिक और सुसारिया के लिए भी सम्मान राशि स्वीकृत करने की मांग की. धरना प्रदर्शन के उपरांत प्रतिनिधि मंडल ने बीडीओ को ज्ञापन सौंपा. धरना को समाजसेवी लेबेन हांसदा, महादेव हांसदा, विश्वजीत सोरेन, सीताराम मुर्मू, ऑफिसर हेंब्रम एवं बाबुधन मरांडी ने भी संबोधित किया. मौके पर मांझी वासुदेव मुर्मू, दरोगा मुर्मू, सहदेव सोरेन, छोटेलाल टुडू, उद्देश्वर हांसदा, मिसिल हांसदा आदि मौजूद रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JIYARAM MURMU

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