पढ़ा लिखा नहीं, बन गये डॉक्टर

Updated at : 17 Nov 2017 5:52 AM (IST)
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पढ़ा लिखा नहीं, बन गये डॉक्टर

आफत की पुड़िया . दर्जनों नर्सिंग होम व जांच घर चल रहे बिना पंजीकरण के अवैध संचालित नर्सिंग होम को बंद करने के बजाय उसपर मेहरबान है स्वास्थ्य विभाग मामूली इलाज में भी लोगों की जेब ढ़ीली कर रहे एेसे संस्थान जामताड़ा : जामताड़ा व मिहिजाम में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम व […]

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आफत की पुड़िया . दर्जनों नर्सिंग होम व जांच घर चल रहे बिना पंजीकरण के

अवैध संचालित नर्सिंग होम को बंद करने के बजाय उसपर मेहरबान है स्वास्थ्य विभाग
मामूली इलाज में भी लोगों की जेब ढ़ीली कर रहे एेसे संस्थान
जामताड़ा : जामताड़ा व मिहिजाम में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम व जांच घर पर शिकंजा कसने की हर साल तैयारी होती है. कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है. दो वर्ष पहले ऐसे संस्थानों पर स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसा था. लेकिन पैरवी व जुगाड़ के बदौलत ऐसे नर्सिंग होम आज तक चल रहे हैं. उधर ऐसे नर्सिंग होम के चक्कर में फंस कर लोग अपनी गाढ़ी कमाई इलाज में फंसा रहे हैं. ना तो इसपर सरकार का ध्यान है ना ही स्थानीय स्वास्थ्य विभाग का. सिर्फ जामताड़ा व मिहिजाम शहर ही नहीं बल्कि प्रखंडों में भी ऐसे नर्सिंग होम व जांच घर संचालित हैं.
नारायणपुर, फतेहपुर, कुंडहित, मुरलीपहाड़ी, नाला में ऐसे दर्जनों संस्थान हैं जो स्थानीय भोले भाले लोगों की जेब ढीली कर रहा है. कई नर्सिंग होम व जांच घर तो ऐसे हैं जिसमें कथित रूप से डॉक्टर काम कर रहे हैं. ऐसे कई संचालकों ने कभी डॉक्टरेट किया नहीं लेकिन बोर्ड में अपने नाम के सामने डॉक्टर लगाते हैं. जो कानूनन जुर्म भी है. ऐसे चिकित्सक तो बना कुछ पढ़े लिखे व अनुभव के महिलाओं का प्रसव भी करा देते हैं. जामताड़ा शहर में आधे दर्जन ऐसे नर्सिंग होम केवल प्रसव के लिए ही चर्चित हैं.
क्या कहते हैं सीएस
जिले में अवैध रूप से संचालित सभी निजी नर्सिंग होम व पैथोलैब काे जांच कर बंद किया जायेगा. जिला में चलाये जा रहे सभी नर्सिंग होम को लाइसेंस लेना अनिवार्य है.
– डॉ बीके साहा, सीएस, जामताड़ा
पंजीकृत 36 नर्सिंग होम व चार पैथोलैब लिस्ट में
जामताड़ा जिले में मात्र 36 नर्सिंग हाेम व चार पैथोलैब ही पंजीकृत हैं, जाे स्वास्थ्य विभाग की लिस्ट में भी है. लेकिन जिले में फिलहाल करीब 70 नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं. कई तो बिहार से फर्जी रूप से आकर यहां नर्सिंग होम चला रहे हैं. दो साल पूर्व भी एक नर्सिंग होम ने अपनी स्मिता बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पर पैरवी की लड़ी लगा दी थी.
कई बिना पंजीयन के कई क्लिनिक
जिले में कई ऐसे नर्सिंग होम हैं जिनका पंजीयन तक नहीं हुआ है. और सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड का भी अनुपालन नहीं किया जा रहा है. जिला में झोला छाप डाॅक्टरों द्वारा मामूली इलाज से लेकर ऑपरेशन तक कर देते हैं. जिससे कई बार मरीजों का हालात खराब हो जाती है. इसको लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है.
क्लिनिक में हो रही मरीजों से ठगी
अवैध क्लिनिकों में मरीजों से मनमानी फीस व ठगी करने का भी काम किया जाता है. जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध रूप से संचालित क्लिनिकों पर कार्रवाई नहीं की जाती. ऐसे में रोजाना स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना मान्यता लिए अवैध रूप से क्लिनिकों का संचालन किया जा रहा है.
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