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Jamshedpur News : गोविंदपुर में फिर जलापूर्ति बंद, 6 लाख लोग प्रभावित

Updated at : 31 Dec 2025 1:13 AM (IST)
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Jamshedpur News : गोविंदपुर में फिर जलापूर्ति बंद, 6 लाख लोग प्रभावित

Jamshedpur News : गोविंदपुर जलापूर्ति योजना से एक बार फिर से जलापूर्ति बंद कर दी गयी. ठेकेदार को एक बार फिर से आश्वासन के बावजूद पेयजल विभाग द्वारा पैसे का भुगतान नहीं किया गया.

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एजेंसी का दो साल का 3.6 करोड़ रुपये विभाग पर बकाया

जलापूर्ति योजना के मजदूरों को 6 माह से नहीं मिला है वेतन

Jamshedpur News :

गोविंदपुर जलापूर्ति योजना से एक बार फिर से जलापूर्ति बंद कर दी गयी. ठेकेदार को एक बार फिर से आश्वासन के बावजूद पेयजल विभाग द्वारा पैसे का भुगतान नहीं किया गया. अब पूरे इलाके में जलापूर्ति बंद कर दी गयी है. राज्य सरकार पिछले कई सालों से ठेका एजेंसी को सिर्फ आश्वासन दे रही है, पैसे नहीं दे रही है. लिहाजा, एजेंसी ने बकाया का भुगतान नहीं होने की स्थिति में एक बार फिर से जलापूर्ति को बंद कर दिया है. एजेंसी का बकाया बढ़कर 3.6 करोड़ रुपए हो गया है. एजेंसी के तहत काम करनेवाले 34 मजदूरों को दिसंबर मिलाकर 6 माह से वेतन नहीं मिला है, इसलिए एजेंसी और मजदूरों ने अब पूरी तरह काम बंद करने की चेतावनी दी थी. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. जिसके बाद एजेंसी ने जलापूर्ति बंद कर दी.

डीसी से मिले गोविंदपुर के लोग, मिला आश्वासन

मंगलवार को गोविंदपुर के स्थानीय लोग डीसी से मिलने पहुंचे और जलापूर्ति को चालू कराने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल में जमशेदपुर प्रखंड के उपप्रमुख शिवकुमार हांसदा, पंचायत समिति सदस्य सतबीर सिंह बग्गा, किशोर कुमार सिंह, रैना पूर्ति, रुद्र मुंडा, साकरो सोरेन, संगीता पात्रो और ग्रामीण मुख्य रूप से उपस्थित थे. इन लोगों को एक बार फिर से आश्वासन देकर वापस भेज दिया गया. गोविंदपुर जलापूर्ति योजना से 21 पंचायतों में लगभग 1.5 लाख कनेक्शन दिया गया है. एक परिवार में औसतन चार सदस्य मानें, तो करीब 6 लाख की आबादी इससे जुड़ी है.

बिना पैसे के योजना का संचालन संभव नहीं : एजेंसी

वर्तमान में जलापूर्ति विभाग ने योजना के संचालन का जिम्मा एजेंसी जेमिनी इंटरप्राइसेस को दिया है. एजेंसी के ठेकेदार का कहना है कि योजना के संचालन में प्रति माह 15 लाख रुपये का खर्च आता है. इसमें 34 मजदूरों के वेतन पर प्रतिमाह 5 लाख रुपये और सफाई, फिटकरी, केमिकल, बिजली व अन्य मद में करीब 10 लाख रुपये के खर्च आते हैं. 15 लाख गुना 24 = 3.6 करोड़ रुपए हो जायेंगे. बकाया नहीं मिलने से योजना का संचालन अब संभव नहीं है. इस कारण इसको बंद कर दिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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