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प्रभात खबर ने लोकल को वोकल करने का निभाया दायित्व

Updated at : 03 Sep 2020 9:23 AM (IST)
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प्रभात खबर ने लोकल को वोकल करने का निभाया दायित्व

प्रभात खबर 25 वां वर्षगांंठ

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जमशेदपुर : अखबार खबरों का समूह होता है. हर खबर समय और समाज की धड़कन होती है. इस तरह अखबार को समय और समाज की धड़कनों का एक जिम्मेदार और जवाबदेह कोलाज कहा जा सकता है. प्रभात खबर ने अपने पहले कदम से लेकर अब तक समय और समाज की धड़कनों को कायदे से पहचाना है.

एक जिम्मेदार नागरिकता का बोध इस अखबार ने विकसित किया है, ऐसा मैं अपने अनुभवों के आधार पर कह सकती हूं. चाईबासा में बतौर प्राचार्या करियर की शुरुआत करने के समय से लेकर अभी तक अगर प्रभात खबर की यात्रा को देखती-परखती हूं तो पूरे भरोसे के साथ कह सकती हूं कि इस अखबार ने अपने विजन को व्यवहार में बदला है.

‘अखबार नहीं आंदोलन’ की भावना को अक्षरशः जिया है. आज से पच्चीस साल पहले, जब यह अखबार छपना शुरू हुआ तो इसके सामने चुनौतियां तो थीं हीं. कुछ बड़े अखबार जिनकी लोकप्रियता आसमान छू रही थी, जिनका वित्तीय आधार मजबूत था, जिनकी ग्राहकता उत्कर्ष पर थी, उसमें खुद को लोगों के भरोसे के लायक साबित करना चुनौतीपूर्ण था. लेकिन कहना न होगा कि प्रभात खबर के विजनरी प्रबंधन और संपादन संस्कृति ने इसे जल्दी ही लोगों की नजरों में जगह दे दी.

झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन को इस अखबार ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया. यूं कहें कि झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन के पत्रकारीय मोर्चे पर प्रभात खबर ही खड़ा था. आंदोलन के नेतृत्वकर्त्ताओं के प्रयासों की समीक्षात्मक रिपोर्टिंग से लेकर आम और गंवई गांव की जनता की भावना को लगातार छापकर एक ऊर्जा से भरा परिवेश इस अखबार ने निर्मित किया. और कहते हैं न कि यदि आप किसी पवित्र उद्देश्य को अपना संकल्प बना लेते हैं तो फिर राहें खुलती चली जाती हैं.

सबको साथ लेकर चलने की सोच प्रभात खबर में शुरू से रही है. इसके नाम पर ही गौर करें. ‘प्रभात’ विशुद्ध हिंदी का शब्द है और ‘खबर’ पर्सियन ढब का अल्फाज़ है. दोनों भाषाओं के शब्द लेकर इस साझे नामकरण में साझी संस्कृति, जिसे गंगा-जमुना तहजीब भी कहते हैं, वह समायी हुई है.आप कल्पना करें कि आज से पच्चीस साल पहले जब इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी का सहयोग कम रहा होगा और पहले से प्रतिष्ठित अखबारों को ही पढ़ने के लोग अभ्यस्त रहे होंगे, वहां अपनी जगह बना लेना, और आज लीडिंग अखबार की हैसियत रखना, एक लंबी तपस्या का परिणाम से क्या कम है.

posted by : sameer oraon

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