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पीएम मोदी से सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग, दो और युवाओं ने दी आत्मदाह की धमकी

Updated at : 14 Nov 2023 12:15 PM (IST)
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पीएम मोदी से सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग, दो और युवाओं ने दी आत्मदाह की धमकी

बागबेड़ा जाटाझोपड़ी के विक्रम हेम्ब्रम व पृथ्वी मुर्मू ने भी उलिहातू में जाकर आत्मदाह करने की धमकी दे दी है. आत्मदाह की घोषणा के बाद पुलिस प्रशासन उन युवाओं के बारे में पता लगा रहा है, ताकि उन्हें समझाया जा सके और ऐसा करने से रोका जा सके.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती सह जनजातीय गौरव महोत्सव पर उलिहातू आगमन से पूर्व आदिवासी सेंगेल अभियान ने सरना धर्म कोड को मान्यता देने के मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में अभियान से जुड़े चार कार्यकर्ताओं ने बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रधानमंत्री के द्वारा सरना धर्म कोड को मान्यता देने की घोषणा नहीं करने पर आत्मदाह करने की घोषणा की है. पूर्व में दो युवाओं की घोषणा के बाद बागबेड़ा जाटाझोपड़ी के विक्रम हेम्ब्रम व पृथ्वी मुर्मू ने भी उलिहातू में जाकर आत्मदाह करने की धमकी दे दी है. आत्मदाह की घोषणा के बाद पुलिस प्रशासन उन युवाओं के बारे में पता लगा रहा है, ताकि उन्हें समझाया जा सके और ऐसा करने से रोका जा सके. उल्लेखनीय है कि 15 नवंबर को पीएम का उलिहातू में बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम है. साथ ही वे खूंटी स्टेडियम में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे.

इन युवाओं ने दी है आत्मदाह की चेतावनी

पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड निवासी कान्हू राम टुडू, पूर्वी सिंहभूम के बागबेड़ा जाटा झोपड़ी निवासी विक्रम हेंब्रम व पृथ्वी मुर्मू तथा बोकारो के पेटरवार निवासी चंद्रमोहन मार्डी. कदमा में विक्रम हेम्ब्रम और पृथ्वी मुर्मू ने कहा कि बिरसा मुंडा की जन्मस्थली में प्रधानमंत्री का स्वागत है, लेकिन सरना धर्म कोड को मान्यता को पूरा होते देखना चाहते हैं. पीएम मोदी उनकी मांग को जरूर पूरा करेंगे, ऐसी उम्मीद है.

पीएम मोदी से है उम्मीद : सालखन

आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कदमा में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पीएम मोदी जब 15 नवंबर को झारखंड की धरती पर आयेंगे तो उन्हें सरना धर्म कोड की सौगात देकर जायेंगे. उन्होंने बताया कि सेंगेल अभियान के युवाओं ने 15 नवंबर को सरना धर्म कोड को मान्यता नहीं देने पर आत्मदाह करने की घोषणा की है. सेंगेल अभियान उनकी बालिदानी भावना की सराहना करता है. हालांकि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है.

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जिला व प्रखंड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन कल

पीएम तक अपनी बात पहुंचाने के लिए आदिवासी सेंगेल अभियान बुधवार (15 नवंबर) को झारखंड समेत सात राज्यों के सभी जिला व प्रखंड मुख्यालयों पर धरना- प्रदर्शन करेगा.

सरना धर्म कोड की सौगात देकर जाएं पीएम मोदी : मोहन कर्मकार

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सह जिला बीस सूत्री कमेटी उपाध्यक्ष मोहन कर्मकार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के पैतृक गांव उलिहातू आ रहे हैं. झामुमो उनका स्वागत करता है. वे किसी भी मकसद से यहां आ रहे हों, लेकिन उन्हें यहां रहने वाले जनमानस की मांग को टटोलने का प्रयास जरूर करना चाहिए. आदिवासी समाज लंबे समय से सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग करते आ रहे हैं. इसलिए पीएम मोदी से आग्रह करते हैं कि वे आदिवासी समाज को सरना धर्म कोड सौगात के रूप में दे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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