एक महीने पहले जंगलों से पकड़े गये विषधर सांपों को नदी में कराया स्नान, गले में लपेटकर जतायी आस्था
गले में कोबरा लपेटकर आस्था दिखाते.
धालभूमगढ़ के खरबंदा में 350 साल पुरानी मनसा पूजा और झापान मेला आयोजित। श्रद्धालुओं ने गले में कोबरा लपेटकर दिखाई अद्भुत आस्था, उमड़ा जन सैलाब।
धालभूमगढ़ : कहीं गले में लिपटा फन फैलाये कोबरा, कहीं पालकी पर सवार झापान और चारों ओर उमड़ा आस्था का सैलाब. धालभूमगढ़ के खरबंदा में मंगलवार को मनसा पूजा और झापान मेले में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. एक महीने पहले जंगल से पकड़े गये विषधर सांपों को नदी में स्नान कराया गया. इसके बाद गले में सांप लपेटकर आस्था जतायी. करीब 350 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए. झापान में शामिल लोगों ने गले में कोबरा सांपों को धारण कर मां मनसा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की. इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए दूर-दराज से भी लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.
जंगल से एक माह पहले पकड़े जाते हैं सांप
मोहलीशोल पंचायत के खरबंदा में मनसा पूजा की तैयारियां करीब एक महीने पहले से शुरू हो जाती हैं. परंपरा के अनुसार विभिन्न जंगलों से कोबरा नाग पकड़े जाते हैं. उन्हें सुरक्षित रखा जाता है. पूजा के दिन मनसा मंगल का गायन होता है और इसके बाद झापान की परंपरा निभाई जाती है. रोहिन दास और उनके पुत्र समीरन दास इस पारंपरिक पूजा में नागों की पूजा-अर्चना करते हैं. उन्होंने बताया कि करीब 350 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है.

गले में सांपों को लपेटकर निकाली पालकी
मनसा मंगल के गायन के बाद झापान बनने वाले लोग पालकी पर सवार हुए. इस दौरान उन्होंने कोबरा सांपों को अपने गले में लपेटकर आस्था का प्रदर्शन किया. सांपों को गले में धारण किए झापान को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. आयोजकों के अनुसार, झापान में शामिल लोगों को सांप के काटने से बचाने के लिए पारंपरिक रूप से जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. रोहिन दास ने बताया - गांव के कई लोगों को सांप के काटने के उपचार की जानकारी है और जंगल से विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियां एकत्र कर रखी जाती हैं. उन्होंने ऐसी कई जड़ी-बूटियां भी लोगों को दिखाईं.
दिघी बांध तक पहुंचा झापान, सांपों को कराया स्नान
इस वर्ष खोकन पंडित और समीरन दास झापान बनकर पालकी पर बैठे. सभी सांपों को गले में धारण कर झापान दिघी बांध तक पहुंचा. वहां सांपों को नहलाकर पूजा की गई. इसके बाद घट लेकर वापस आया गया.

रात में मनसा मंगल का हुआ गायन
रात में मनसा मंगल का गायन हुआ. मौके पर विधायक सोमेश चंद्र सोरेन भी पहुंचे. उन्होंने कहा - मैंने आज तक इस तरह का झापान नहीं देखा था. उनके लिए यह आस्था की अद्भुत मिसाल है. उन्होंने कहा कि मां मनसा के प्रति लोगों की गहरी आस्था है. विधायक ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनके पिता दिवंगत रामदास सोरेन ने ग्रामीणों से जो वादे किए थे, उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा. मनसा मेला मंच के अधूरे कार्यों के साथ सड़क की मरम्मत भी कराई जाएगी.
राजा के समय से चली आ रही है पूजा
मनसा पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार दास ने बताया - खरबंदा-मोहलीशोल गांव बसने के समय से ही यहां मनसा पूजा होती आ रही है. मान्यता है कि धालभूम के राजा के समय इस पूजा की शुरुआत हुई थी. करीब 350 वर्षों से ग्रामीण इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बताया - गांव के जो लोग रोजगार के सिलसिले में देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं, वे भी पूजा के दौरान अपने गांव लौटते हैं. तीन दिनों तक पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है.
20 अगस्त को होगा घट विसर्जन
तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन का समापन 20 अगस्त को घट विसर्जन के साथ होगा. इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष अजीत दास, सचिव दीपक दास, कोषाध्यक्ष तुषार पंडित के अलावा झापान गुरु खिरोध बिहारी उस्ताद, पूर्ण चंद्र काहिली, रोहिन दास, राधावल्लभ उस्ताद, तुषारकांत पंडित, निखिल दास, अजय पंडित, सोमनाथ पंडित आदि का अहम भूमिका रही.
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लेखक के बारे में
By मो. युनूस परवेज
मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.
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