सरकारी स्कूलों के मासिक टेस्ट की कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी, गलत उत्तर के बाद भी मिले पूरे अंक

Published by :Sameer Oraon
Published at :08 Oct 2022 12:58 PM (IST)
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सरकारी स्कूलों के मासिक टेस्ट की कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी, गलत उत्तर के बाद भी मिले पूरे अंक

सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं तक के मासिक टेस्ट की कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी मिली है. किसी बच्चे ने सिर्फ प्रश्न लिखा, तो किसी ने गलत उत्तर, कई कॉपियाें में एक जैसे आंसर लिखे गये हैं.

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जमशेदपुर: झारखंड के सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं तक के मासिक टेस्ट की कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी मिली है. किसी बच्चे ने सिर्फ प्रश्न लिखा, तो किसी ने गलत उत्तर, कई कॉपियों में एक जैसे आंसर लिखे गये हैं. इसके बावजूद उन्हें पूरे नंबर मिले हैं. मामला जमशेदपुर का है. दरअसल, जिले के सरकारी स्कूलों में उपायुक्त विजया जाधव ने हर माह नौवीं से 12वीं क्लास तक के विद्यार्थियों का टेस्ट लेने का निर्देश दिया था. उक्त निर्देश के आलोक में सभी स्कूलों में पिछले माह टेस्ट लिया गया था.

स्कूल के शिक्षकों द्वारा 90 फीसदी कॉपियों का मूल्यांकन किया गया, लेकिन उसी में 10 फीसदी कॉपियों की जांच प्रशासनिक अधिकारियों से करवायी गयी. इसमें बड़े पैमाने पर लापरवाही पायी गयी. शिक्षकों ने ना ही परीक्षा को गंभीरता से लिया और ना ही कॉपियों की जांच ही सही तरीके से की. यही कारण है कि उपायुक्त की ओर से सभी शिक्षकों को यह निर्देश दिया गया है कि मासिक टेस्ट को गंभीरता से लें. अगर सही प्रकार से परीक्षा व मूल्यांकन कार्य व बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, तो शिक्षकों पर कार्रवाई होगी.

मूल्यांकन में क्या-क्या पाया गया

  • कई स्कूलों में बच्चों ने एक ही तरह से उत्तर लिखा था, यह इस बात को दर्शाता है कि कदाचार मुक्त परीक्षा नहीं हुई.

  • कई शिक्षकों ने बच्चों को वर्तनी की अशुद्धियां, विराम चिह्न नहीं देने के बावजूद भी पूर्ण अंक दे दिये, इससे बच्चों में इस प्रकार का भ्रम होगा कि गलत उत्तर लिखने पर भी पूरे अंक मिलते हैं.

  • कई बच्चों ने केवल प्रश्न लिख दिया, लेकिन उन्हें भी अंक दे दिये गये.

  • सही उत्तर लिखने के बाद भी कई बच्चों को अंक नहीं दिये गये.

  • कई बच्चों ने गणित के उत्तर को याद कर लिया था. इसमें बनाने का पूरा प्रॉसेस गलत था, लेकिन अंत में उत्तर सही था. इस प्रकार के विद्यार्थियों को भी पूरे उत्तर दे दिये गये थे.

मासिक टेस्ट को लेकर यह है एसओपी

  • मासिक टेस्ट शुरू होने से पूर्व सभी प्रश्नों को ब्लैक बोर्ड पर लिखा जाये, ताकि बच्चे प्रश्नों को सही प्रकार से समझ सकें.

  • मासिक टेस्ट कब है? इसकी जानकारी एसएमएस के माध्यम से स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों के अभिभावक को जरूर दी जाये, ताकि वे उक्त तिथि को अपने बच्चों को जरूर स्कूल भेजें.

  • इस प्रकार के प्रश्नों का चयन करें, जो बोर्ड परीक्षा में पूछे जा सकते हैं, ताकि बच्चों का परीक्षा को लेकर बेहतर अभ्यास हो सके.

  • जिन बच्चे ने बेहतर अंक हासिल किया है, उन्हें प्रोत्साहित किया जाये, ताकि वह आगे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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