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Jamshedpur News : कैरव अपहरणकांड : पुलिस जांच की सुई अपनों की ओर

Updated at : 18 Jan 2026 12:55 AM (IST)
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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : बिष्टुपुर के चर्चित उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में 89 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. अब तक न तो अपहृत कैरव का कोई सुराग मिला है

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89 घंटे बीते, घरवाले परेशान, नतीजा शून्य

घर में पसरा है सन्नाटा, मां का रो-रोकर बुरा हाल

Jamshedpur News :

बिष्टुपुर के चर्चित उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में 89 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. अब तक न तो अपहृत कैरव का कोई सुराग मिला है और न ही अपहरणकर्ताओं का पता चल पाया है. इस घटना ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है और परिवार गहरे सदमे में है. पुलिस इस मामले की जांच हर एंगल से कर रही है. खास बात यह है कि अब जांच की सुई अपनों की ओर भी घूम रही है. पुलिस कैरव के करीबी दोस्तों, परिचितों और उन रिश्तेदारों की भी जानकारी जुटा रही है, जिनसे उनके संबंध ठीक नहीं थे. पुलिस यह भी खंगाल रही है कि कॉलेज के दिनों में कैरव के साथ किसी तरह की दुश्मनी या विवाद तो नहीं हुआ था.

कैरव गांधी पिछले साल मार्च में पुणे से एमबीए की पढ़ाई पूरी कर जमशेदपुर लौटे थे और पिता की कंपनी में डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे थे. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि हाल के दिनों में शहर से बाहर जाने के दौरान उनका किसी से कोई विवाद तो नहीं हुआ था. अब तक पुलिस जमशेदपुर समेत अन्य जिलों और राज्यों के 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल चुकी है. जांच के दौरान चांडिल के पाटा टोल प्लाजा पर एक “पुलिस” लिखी सफेद स्कॉर्पियो की तस्वीर मिली है, जिस पर संदेह जताया जा रहा है. इसी गाड़ी में कैरव के अपहरण की आशंका है. दिलचस्प बात यह है कि रास्ते में इस वाहन से “पुलिस” का स्टीकर हटा दिया गया था. वही स्कॉर्पियो पुरुलिया टोल प्लाजा के फुटेज में भी दिखी है, लेकिन उसमें सिर्फ चालक ही नजर आ रहा है. इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि चांडिल से पुरुलिया के बीच कैरव को किसी दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया गया होगा.

पुलिस बिहार और बंगाल के किडनैपिंग गिरोहों की भूमिका की भी जांच कर रही है. जिस स्कॉर्पियो का इस्तेमाल हुआ, उसमें कोडरमा जिले के एक बोलेरो का नंबर प्लेट लगा था, जिससे मामला और उलझ गया है. पुलिस पिछले 10 वर्षों में हुए अपहरण मामलों के अपराधियों की सूची भी खंगाल रही है और जेल में बंद शातिर बदमाशों पर नजर रखी जा रही है.

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कोल्हान डीआइजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने जमशेदपुर और सरायकेला पुलिस की संयुक्त एसआइटी का गठन किया है. सात अलग-अलग टीम बनायी गयी हैं. कुछ टीमें बिहार और बंगाल भेजी गयीं हैं, कुछ सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं, जबकि एक टीम कैरव के करीबी लोगों की जानकारी जुटा रही है.

इधर, बेटे के गायब होने से कैरव के परिवार की हालत बेहद खराब है. मां का रो-रोकर बुरा हाल है. घर में सन्नाटा पसरा है और परिजन हर पल किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं. गौरतलब है कि मंगलवार को बिष्टुपुर सीएच एरिया से कैरव का अपहरण किया गया था. अपहरणकर्ताओं ने थाईलैंड के नंबर से उनके पिता देवांग गांधी को 14 बार और चाचा प्रशांत गांधी को तीन बार व्हाट्सएप कॉल किया था, जो पेशेवर अपराधियों की ओर इशारा करता है.

ड्राइवर सीट के नीचे मिली चाबी…चर्चा

बिष्टुपुर सीएच एरिया के उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण में कुछ तथ्य चौकानेवाले हैं. जिसे लेकर चर्चा है. कैरव का अपहरण करने के बाद अपहरणकर्ताओं ने कार एनएच किनारे क्यों खड़ी की? जबकि रास्ते में कई सुनसान स्थल हैं. इसके अलावा कार की चाबी ड्राइवर सीट के नीचे रखा जाना? आखिर अपराधियों ने कार का गेट खुला क्यों छोड़ा?. इसकी भी चर्चा लोग कर रहे हैं. लोगों की मानें तो कही कैरव के अपहरण में पुलिस व घरवालों को चकमा देने के उद्देश्य से तो नहीं यह कदम उठाया गया है. कैरव का मोबाइल सोनारी क्षेत्र में बंद हुआ. जबकि कार एनएच स्थित कांदरबेड़ा में एनएच किनारे मिली.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJESH SINGH

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RAJESH SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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