जमशेदपुर : सुवर्णरेखा नगरी में कवि और कविताओं का संगम, एक तरफ लाइव पेंटिंग, तो दूसरी तरफ कविताओं की बही रसधार

Updated at : 10 Dec 2023 5:11 AM (IST)
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जमशेदपुर : सुवर्णरेखा नगरी में कवि और कविताओं का संगम, एक तरफ लाइव पेंटिंग, तो दूसरी तरफ कविताओं की बही रसधार

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. स्वागत गीत किस विधि वंदन करू तिहारी, शिव ओम, हरी ओम... की प्रस्तुति से हुआ.

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लाइफ रिपोर्टर@जमशेदपुर : जोदी कोनोदिन निर्वाचन होय, आमी सर्वाधिक वोटे निर्वाचितो होबो, आमार सपक्षे थाकबे आकाश नक्षत्र, नदी, तारा, तुमी…आर तोमार चुंबन…इन्हीं पंक्तियों के साथ बांग्ला एकेडमी पुरस्कार से सम्मानित अशद मन्नान ने सुर व साहित्य द्वारा सेंटर फॉर एक्सिलेंस में आयोजित सुवर्णरेखार कलतान (साहित्य व सांस्कृतिक उत्सव) में सराहना बटोरी. उन्होंने कहा कि मैं पहली बार टाटा नगरी में आया हूं. यहां लोगों में मानुष दिखा. आजकल मानुष देखा जाये ना…उन्नत जीव मनुष्य के रूप में नजर आ रहे हैं. प्रकृत मनुष्ट नहीं दिखते हैं. आगे उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि मानो सुवर्णरेखा की नगरी में कवि और कविताओं का संगम हो रहा है. इतने कवियों की कविताओं का सुनने का मौका मिलना, स्वर्णिम अवसरों में एक है. कार्यक्रम विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्योगपति व समाजसेवी विकास मुखर्जी, कवि शाह मुहम्मद सनऊल हक, संपादक व कवि मेघनाथ घोषाल व अन्य शामिल थे.

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. स्वागत गीत किस विधि वंदन करू तिहारी, शिव ओम, हरी ओम… की प्रस्तुति से हुआ. विधु चंदन ऑल इतुन ग्रुप ने झारखंड की संस्कृति की झलक दिखाते हुए संथाली गीत पेश किया. स्पर्श के अध्यक्ष एवं टाटा स्टील के पूर्व चीफ इंजीनियर मिलन सान्याल ने स्वागत भाषण दिया. मृत्युंजय चौधरी ने संगीत की प्रस्तुति दी. आगे बांग्लादेश से काजी अनारकली बंग बंधु को समर्पित करते हुए केमोन आमार बांग्लादेश कविता का पाठ किया, तो वहीं शाह मुहम्मद सनऊल हक ने तोखन तितास नदी कुल कुल, अविराम बोये चला, तोखन गभीर रात, सीनारे कारो आंगुल… कविता की प्रस्तुति दी.

कार्यक्रम में 70 कवि हुए शामिल

कार्यक्रम का माहौल बहुत ही अलग रहा. एक तरफ शहर के जूनियर और सीनियर कलाकार लाइव पेंटिंग बना रहे थे, तो वहीं पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश (ढाका) व स्थानीय कवियों ने कविताओं की प्रस्तुति दी. करीब 70 कवि इसका हिस्सा बने. संथाली, हो, हिंदी, बांग्ला व अन्य भाषाओं में कविता पाठ हुआ. इस दौरान तोमार आकाश नाटक का भी मंचन हुआ. लेखक अंजन बागची, आर्टिस्ट विमल चक्रवर्ती, रंगकर्मी कृष्णा सिन्हा , डोला बाजपेयी भट्टाचार्य शामिल रहीं.

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