हर बारिश में तालाब बन जाता है इलाका, अब इस दिन सड़क जाम करने की तैयारी में हैं लोग
ग्रामसभा में शामिल लोग.
करनडीह में जलजमाव की विकराल समस्या अब आंदोलन का रूप ले चुकी है. जर्जर नालियों और बदहाल जल निकासी व्यवस्था से परेशान ग्रामीणों ने 10 दिनों में स्थायी समाधान की मांग की है, अन्यथा मुख्य सड़क जाम करने की चेतावनी दी है.
जमशेदपुर : करनडीह में जलजमाव की समस्या अब आंदोलन का रूप लेने लगी है. वर्षों से जर्जर नालियों और जल निकासी की बदहाल व्यवस्था से परेशान ग्रामीणों और फ्लैटवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. ग्रामसभा में साफ कर दिया गया कि यदि 10 दिनों के भीतर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो करनडीह मुख्य सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. रविवार को करनडीह सरजामटोला अखड़ा में माझी बाबा सालखू माझी की अध्यक्षता में ग्रामसभा का आयोजन किया गया. बैठक में करनडीह के सभी 10 टोलों के लोगों के अलावा परसुडीह-प्रमथनगर क्षेत्र के विभिन्न फ्लैटों में रहने वाले लोगों ने भी हिस्सा लिया.
जर्जर नालियों और बंद जल निकासी मार्ग पर जताई नाराजगी
ग्रामसभा में करनडीह फाटक के पास लंबे समय से बनी जलजमाव की समस्या और जर्जर नालियों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई. लोगों ने कहा कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है. बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार को ग्रामीण और फ्लैटवासी माझी बाबा सालखू सोरेन के नेतृत्व में बीडीओ और सीओ से मुलाकात करेंगे. इस दौरान अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर 10 दिनों के भीतर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की जाएगी.
पुराने जल निकासी मार्ग को फिर से खोलने की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिस रास्ते और नाले से बारिश का पानी आसानी से निकल जाता था, वह अब बंद हो चुका है. इसी कारण पूरे इलाके में जलजमाव की समस्या बढ़ गई है. लोगों ने प्रशासन से पुराने जल निकासी मार्ग को तत्काल खोलने की मांग की है. ग्रामसभा में लोगों ने प्रशासन पर टाल-मटोल का आरोप लगाया. उनका कहना है कि प्रशासन अलग-अलग बैठकों के जरिए केवल औपचारिकता निभा रहा है. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो करनडीह मुख्य सड़क जाम कर आंदोलन किया जाएगा.
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लेखक के बारे में
By दशमत सोरेन
दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.
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