गालूडीह में 40 एकड़ में फैले सरकारी तालाब बड़ाबांध का होगा जीर्णोद्वार, लघु सिंचाई विभाग की टीम ने की मापी

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7जी 8- पाटमहुलिया मौजा में बड़ाबांध की मापी करने पहुंची अभियंताओं की टीम | Prabhat Khabar Network

गालूडीह में 40 एकड़ में फैले बड़ाबांध तालाब के जीर्णोद्वार की प्रक्रिया शुरू। लघु सिंचाई विभाग ने मापी की, 40 गांवों के किसानों को मिलेगा सिंचाई का लाभ।

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गालूडीह: घाटशिला प्रखंड के गालूडीह स्थित महुलिया पंचायत के पाटमहुलिया मौजा में 40 एकड़ में फैले सरकारी तालाब बड़ाबांध का जीर्णोद्वार होगा. जल संसाधन लघु सिंचाई विभाग की टीम ने शुक्रवार को विभागीय स्वीकृति मिलने पर स्थल निरीक्षण कर तालाब की मापी कार्य शुरू किया. विधायक सोमेश चंद्र सोरेन की पहल पर बड़ाबांध के जीर्णोद्वार की विभागीय स्वीकृति मिलते ही लघु सिंचाई विभाग के अभियंताओं की एक टीम आज पहुंची और तालाब की मापी कर डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

टीम में लघु सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता सूरज सुंडी, भवानी शंकर शामिल थे. अभियंताओं ने बताया कि करीब दो करोड़ का डीपीआर बनेगा. यह घाटशिला प्रखंड का एकलौता सबसे बड़ा सरकारी तालाब है. तालाब की पहले सफाई होगी. गाद हटाया जायेगा. फिर खुदाई कर और घहरा किया जायेगा.

तालाब के मेढ़ (तटबंध) बेहतर बनेगा. घाट भी पक्का बनेगा. टीम के साथ स्थानीय झामुमो नेता अशोक महतो, ग्रामीण वासुदेव मंडल आदि भी उपस्थित थे. टीम में शामिल अभियंताओं ने बताया कि स्थानीय विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने इसके जीर्णोद्वार की अनुशंसा की है.

विभागीय स्वीकृत मिल चुकी है और अब मापी कर डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. डीपीआर स्वीकृति के साथ ही जमीन पर बरसात के बाद जाड़े के मौसम में काम शुरू कर दिया जायेगा. गर्मी के मौसम के अंदर काम पूरा करने का लक्ष्य रखा जायेगा.

तीन पंचायत के करीब 40 गांवों इस तालाब पर रहते हैं आश्रित, बड़े भू-भाग में होगी सिंचाई

पाटमहुलिया मौजा में 40 एकड़ में फैले सरकारी तालाब बड़ाबांध में तीन पंचायत महुलिया, उलदा और जोड़सा पंचायत के करीब 40 गांव आश्रित है. इस तालाब के पानी से किसान सिंचाई भी करते हैं. तालाब के जीर्णोद्वार से जल संचय बेतहर होगा तो बड़े भू-भाग में सिंचाई सुविधा मिलेगी. इसके साथ इस तालाब के सौर्दीयकरण कर पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने की असीम संभावना है.

कई दशक से तालाब का जीर्णोद्वार नहीं होने से गाद और कचड़े भर गये है. पानी बीचो-बीच है. चारों ओर तालाब की जमीन मैदान में तब्दील हो गयी है. वर्षा जल संचय के लिए वर्त्तमान समय पर बदलते जलवायु में इसके जीर्णोद्वार से इस क्षेत्र में भूगर्भ जल स्तर भी उपर आयेगा. कई वर्षों से इस तालाब के जीर्णीद्वार की मांग ग्रामीण और किसान करते आ रहे थे.

एक बार पूर्व डीसी हिमानी पांडेय ने भी निरीक्षण किया था. बाद में सांसद विद्युत वरण महतो, मंत्री और विधायक रहते रामदास सोरेन ने भी निरीक्षण किया था. अब विधायक सोमेश सोरेन ने भी पहल की. बड़ा बांध के जीर्णोद्वार से ग्रामीणों और किसानों में खुशी है.


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मो. युनूस परवेज

लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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