ePaper

मजदूरों के लिए गंभीरता से करेगी काम, तभी मजबूत होगी कांग्रेस, प्रभात खबर से बोले इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी

Updated at : 27 Aug 2025 5:20 AM (IST)
विज्ञापन
Dr G Sanjeeva Reddy

इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी

Dr G Sanjeeva Reddy: इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी ने प्रभात खबर से खास बातचीत में कहा कि कांग्रेस को मजदूरों के लिए गंभीरता से काम करना होगा. उनके आंदोलन में शरीक होना होगा, तभी पार्टी मजबूत होगी. जमशेदपुर दौरे पर उन्होंने कहा कि मजदूर हित में काम करने वाला ही इंटक का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा.

विज्ञापन

Dr G Sanjeeva Reddy: जमशेदपुर, ब्रजेश सिंह-कांग्रेस को मजदूरों के बारे में गंभीरता से काम करना होगा. उनके बारे में सोचना होगा. उनके आंदोलन में शरीक होना होगा, तब कांग्रेस मजबूत होगी. इंटक (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी ने प्रभात खबर से खास बातचीत में ये बातें कहीं. वे जमशेदपुर दौरे पर हैं. चार करोड़ सदस्यों वाली देश की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन संगठन इंटक के 95 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी से जब पूछा गया कि उनके बाद कौन अध्यक्ष होगा? इस पर उन्होंने कहा कि अगला अध्यक्ष वह हो, जिसे मजदूर चाहते हैं और जो मजदूरों के हित में काम करता आया है. पेश है इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष से बातचीत के प्रमुख अंश.

मजदूर संगठनों में आपसी लड़ाई है बड़ी समस्या


सवाल : मजदूर संगठन का बड़ा अनुभव आपके पास है, क्या बदलाव देख रहे हैं ?
जवाब : मजदूर संगठनों में आपसी लड़ाई ही बड़ी समस्या है. हम चाहते हैं कि दुनिया भर के कई देशों की तरह हमारे देश के सारे मजदूर संगठन एक हो जायें. इस दिशा में हम लोग काम कर रहे हैं. सभी मजदूर संगठन एक साथ मिलकर काम करें ताकि विवाद समाप्त हो जाये. कुछ एकजुट हुए भी हैं. लेकिन हाल के दिनों में बीएमएस सिर्फ एक नहीं होना चाहता है. इसकी वजह है कि राजनीतिक दलों से सारे मजदूर संगठन जुड़े हैं. इस कारण एकजुट नहीं हो पा रहे हैं. अगर एकजुट होंगे, तो हम मजदूरों का उनका हक ज्यादा दिला पायेंगे.
सवाल : लेबर कोड और केंद्र सरकार के नये श्रम कानून का विरोध क्यों कर रहे हैं ?
जवाब : नये श्रम कानून और नये लेबर कोड को केंद्र सरकार लागू करना चाहती है. केंद्र यह समझ ही नहीं पा रहा है कि वह क्या करना चाहता है. सरकार यह तय नहीं कर पा रही है कि मजदूर हित में श्रम विभाग काम कर रहा है या मालिकों के अनुरुप कानून बनाया जा रहा है. नये लेबर कानून को लेकर हमारा झगड़ा है और हम इस कानून का विरोध करते हैं. इससे ट्रेड यूनियन और मजदूरों को गहरा धक्का लगेगा.
सवाल : इपीएस 95 और पेंशन बढ़ोतरी को लेकर इंटक का क्या स्टैंड है ?
जवाब : हम चाहते हैं कि इपीएस 95 का लाभ सबको मिले. सरकार अपनी ओर से पेंशन की राशि बढ़ाये. मजदूरों के कंट्रीब्यूशन के साथ सरकार का पैसा मिलाकर पेंशन की राशि काफी ज्यादा हो जायेगी. अभी पेंशन की राशि काफी कम है. लोगों को कम पेंशन मिलता है. हम चाहते हैं कि पीएफ ट्रस्ट हो या सरकार की ओर से संचालित इपीएफओ, इनकी कटौती को और बेहतर बनाया जाये और कर्मचारियों को अधिक से अधिक पेंशन मिले.

स्थायी प्रवृत्ति की नौकरी कैसे बचेगी?


सवाल : स्थायी प्रवृत्ति की नौकरी चली जा रही है. कैसे बचेगी नौकरी, आंदोलन तक नहीं हो रहे ?
जवाब : मालिकों का मुनाफा कमाने का नया तरीका है. कांट्रैक्ट पर कर्मचारियों को रखते हैं, जिसे 30 हजार रुपये वेतन मिलना चाहिए, उसे 10 हजार देते हैं और ज्यादा काम करवाते हैं. ऐसी चीजों से लड़ने की जरूरत है. कांट्रैक्ट वर्कर को बराबर काम का बराबर पगार (वेतन) मिले, यह कोशिश हो रही है, जिसके लिए हमारा विरोध है. यह सच है कि हाल के दिनों में कंपनियों के खिलाफ आंदोलन कम हुए हैं. हम चाहते हैं कि समझौता से कंपनी और मजदूर दोनों बचे. इसी तरह सरकार के साथ भी हम लोग बातचीत का रास्ता खोले हुए हैं.
सवाल : 90 प्लस आप हो गये हैं. आपके बाद इंटक का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा ?
जवाब : यह सही है कि नया नेतृत्व आयेगा. मेरी उम्र ज्यादा हो गयी है, लेकिन मैं चाहता हूं कि जिनको मजदूर चाहेंगे, वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेगा. मजदूर जिसको चुनेंगे, वो अध्यक्ष बनेगा. मजदूर हित में जो काम करता आया है, मजदूरों का जो बेहतर नेतृत्व कर सके, उसको ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए.
सवाल : कांग्रेस पार्टी को इंटक मजबूत नहीं कर पा रही है. इसमें इंटक की क्या भूमिका होगी?
जवाब : इंटक हमेशा से कांग्रेस की मदद करती रही है, लेकिन कांग्रेस मजदूर हितों को लेकर गंभीर नहीं हो पाती है. कांग्रेस को समझ बढ़ानी होगी कि मजदूर हित को लेकर लड़ाई लड़े. इंटक का साथ दे ताकि कर्मचारियों में भी विश्वास बढ़े और कांग्रेस और मजबूत हो सके. कांग्रेस को मजदूर हित को लेकर ठोस कदम और रणनीति बनाने की जरूरत है.

ये भी पढ़ें: झारखंड के 4 विश्वविद्यालयों में NEP लागू करने में मार्गदर्शन करेगा IIT ISM धनबाद

विज्ञापन
Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola